धर्मांतरण का गंदा खेल: हर जरूरत पूरा करने का दावा देकर बनाते शिकार, गरीब दलित रहते टारगेट, विदेश से होती फंडिंग
धर्मांतरण का धंधा बहुत गंदा बंदा फंसता है।
धर्मांतरण का धंधा बहुत गंदा बंदा फंसता है। कानपुर में प्रलोभन और अंधविश्वास का भ्रमजाल फैलाकर धर्मांतरण का खेल चल रहा है।
कानपुर, [गौरव श्रीवास्तव]। ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोग कानपुर कमिश्नरेट के विभिन्न इलाकों में काफी समय से सक्रिय हैं। दर्जन भर से अधिक स्थानों पर हर हफ्ते प्रार्थना सभाएं होती हैं। प्रलोभन और अंधविश्वास का भ्रमजाल फैलाकर गुपचुप तरीके के धर्मांतरण का भी खेल चलता है। हिदूवादी संगठनों के विरोध के बाद इनकी गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश जरूर लगा लेकिन धर्मांतरण के इस गंदे खेल को वह पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए। इस गंदे खेल में रोजाना कोई न कोई फंसता है। मिशनरियों से जुड़े लोग गुपचुप तरीके से अपनी मुहिम को अंजाम देने में जुटे हैं।
कमिश्नरेट के कई थानाक्षेत्रों में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में साप्ताहिक सामूहिक प्रार्थना सभा की आड़ में बड़ी खामोशी से धर्मांतरण का खेल हो रहा है। इनके निशाने पर समाज का वंचित, शोषित तबका और कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं। वह लोग कहते हैं हां, हम धर्म परिवर्तन कर ईसाई हो गए हैं। तर्क देते हैं, कि ईश्वर एक है, फिर जहां हमें फायदा होगा वहीं तो रहेंगे।
सूत्र बताते हैं, कि जिले के कुछ हिस्सों में गुपचुप तरीके से धर्मांतरण का गंदा खेल हो रहा है। हर रविवार व मंगलवार को होने वाली प्रार्थना सभाओं में भीड़ जुटती है। हिदूवादी संगठनों के विरोध के बाद सरकारी मशीनरी ने शिकंजा कसा तो आने वालों की संख्या घटती चली गई। लेकिन रोटी, कपड़ा, मकान, नौकरी, शादी, रुपयों के लालच में लोग धर्मांतरण से बाज नहीं आ रहे हैं।
हर जरूरत पूरा करने का करते हैं दावा
मिशनरी से जुड़े लोग गरीब परिवारों से कहते हैं, कि जिस व्यक्ति को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती, समाज में उपेक्षित होता है, वो लोग हमारी मिशनरी से जुड़ते हैं। हम उनके लिए कपड़े, रहने के लिए घर और दो वक्त के खाने का इंतजाम, बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम करते हैं। इससे उसकी जिंदगी बदल जाएगी। लोगों को इस तरह से प्रेरित किया जाता है, कि वह सब कुछ भूलकर ईसाई धर्म अपना लेता है। इसके साथ ही वह दूसरे लोगों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित करने लगता है।
गरीब और दलितों को किया टारगेट
अब तक के पांच मामलों में पुलिस की जांच में सामने आया कि धर्मांतरण करने वाला गिरोह सिर्फ बस्तियों और मध्यम वर्ग से नीचे तबके के लोगों को टारगेट करता है। उनकी बस्तियों में जाकर सभाएं करना, उन्हें चर्च बुलाकर प्रेरित करना और अलग-अलग तरह से लालच देकर ईसाई बना देते हैं। इसके बाद उनके मोहल्ले में एक किराए का मकान लेकर या खरीदकर चर्च बना देते हैं। जहां से सारी गतिविधियां चलने लगती हैं।
विदेश से हो रही करोड़ों की फंडिंग
पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि जांच में सामने आया है, कि किराए का फ्लैट और लाखों रुपये महीने का खर्च विदेश की फंडिंग से होती है। दो मामलों में पकड़े गए आरोपियो ने जेल में बयान के दौरान कहा। इसके बाद जांच शुरू की गई तो उनसे जुड़े लोगों के अकाउंट डिटेल से हुई। चकेरी के श्यामनगर मामले में फंडिंग किस राज्य और देश से हो रही, यह जांच चल रही है। इससे पहले घाटमपुर में पकड़े गए धर्मांतरण सिंडीकेट को सीरिया, नेपाल और कोलकाता से फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस की मानें तो अकाउंट डिटेल से खुलासा होने के बाद शातिरों ने फंडिंग का तरीका बदल लिया है। अब कई चरणों में अलग-अलग जगह से पहले देश में और फिर संबंधित व्यक्ति के अकाउंट में भेजा जाता है। सीधे विदेश से संबंधित व्यक्ति को फंडिंग नहीं की जाती है।
प्रयागराज से जुड़ रहे कानपुर धर्मांतरण के तार
चकेरी के श्याम नगर स्थित फ्लैट में चल रहे धर्मांतरण के खेल के तार प्रयागराज से भी जुड़ रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि धर्मांतरण के आरोप में पकड़े गए अभिजीत और रजत प्रयागराज के एक यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के संपर्क में थे। जांच में मिले साक्ष्यों के अनुसार, 40 दिन की प्रक्रिया पूरी कराए जाने के बाद लोगों को धर्मांतरण के लिए यहीं ले जाया जाता था। धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद पुलिस को फतेहपुर, घाटमपुर और प्रयागराज समेत अन्य जिलों के धर्मांतरण सिंडीकेट से भी इसके तार जुड़ रहे हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है।
रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ होगी
धर्मांतरण मामले में संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी का कहना है, कि धर्मांतरण के मामलों में जांच के दौरान सामने आया है, कि कानपुर से प्रदेश के कई जिलों में नेटवर्क चल रहा है। इतना ही नहीं कई राज्यों में चल रहे धर्मांतरण का सिंडिकेट भी सीधे तौर पर कानपुर से जुड़ा है। कई राज्यों और विदेश से धर्मांतरण कराने वाले लोगों को फंडिंग की जा रही है। पकड़े गए आरोपियों को जल्द ही रिमांड पर लेकर पूछताछ और बैंक डिटेल समेत अन्य जानकारी जुटाई जाएगी। दावा है, कि जल्द कानपुर से यूपी के कई जिलों और राज्यों तक फैले धर्मांतरण के सिंडीकेट का खुलासा करेगी। वहीं, दूसरी तरफ आईबी, एसटीएफ समेत अन्य जांच एजेंसियां भी पूरे मामले की जांच अपने स्तर से कर रही हैं।
धर्मांतरण सिंडिकेट देता मोटा लालच
कमिश्नरेट कानपुर के अंतर्गत धर्म के धंधेबाजों का सिंडिकेट ईसाई बनने पर 4 से 30 हजार रुपये हर महीने देते हैं। ब्रेन वॉश के लिए बच्चों की छठी भी मनवाते हैं। धर्मांतरण मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं हैं। पता चला है, कि धर्मांतरण करने वाले सिंडिकेट का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक ही नहीं, उत्तरप्रदेश के कई जिलों में फैला है। धर्मांतरण कराने वाले धंधेबाज लोगों को प्रेरित करते हैं। धीरे-धीरे ये रकम बढ़ाते जाते हैं। पैसे के लालच और ब्रेनवॉश से लोग आसानी से अपना धर्म बदल रहे हैं। पुलिस को कुछ साहित्य भी हाथ लगे हैं।
