समय से सूचना उपलब्ध न कराने पर लखनऊ के जिलाधिकारी पर लगा 25000 का जुर्माना
लखनऊ, अमृत विचार। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह जीर्णोद्धार के सम्बन्ध में लखनऊ के जिलाधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार के सम्बन्ध में मांगी गई जानकारी समय से न उपलब्ध कराने पर सूचना आयोग ने जिलाधिकारी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए उसकी वसूली का आदेश दिया है।
पांच करोड़ रुपये खर्च और तीन साल से चल रहे जीर्णोद्धार के बावजूद कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का काम पूरा न हो पाने पर थियेटर एवं फिल्म वेल्फेयर एसोसिएशन के सचिव दबीर सिद्दीकी ने संस्कृति विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से सूचना के अधिकार के तहत विभागीय कार्य में लापरवाही, अग्निशमन की प्रक्रिया पूर्ण न होने आदि से सम्बंधित आठ बिन्दुओं पर सप्रमाण सूचनाएं मांगी थीं।
जिलाधिकारी के जन सूचना अधिकारी द्वारा मांगी गई सूचनाएं न मिलने पर दबीर सिद्दीकी ने सूचना आयोग से शिकायत की। जन सूचना अधिनियम 2005 के तहत अपीलकर्ता को समय से सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही ने धारा 18 के तहत केस दर्ज कराया और जिलाधिकारी को तलब किया।
जिलाधिकारी की ओर से नायब तहसीलदार अवधेश बहादुर सिंह सूचना आयुक्त के दफ्तर पहुंचे और कहा कि अपीलकर्ता ने जो सूचनाएं मांगी हैं वह जिलाधिकारी से नहीं निदेशक संस्कृति से सम्बंधित हैं, इसलिए इसका जवाब नहीं दिया जा सका। सूचना आयुक्त ने कहा कि पत्रावली देखने से तो यह पता चलता है कि जिलाधिकारी को जवाब देना चाहिए था।
अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध न कराने पर सूचना आयुक्त ने जिलाधिकारी पर 25 हजार का अर्थदंड लगाते हुए उसकी वसूली के आदेश दिए। सूचना आयुक्त ने प्रमुख सचिव राजस्व को आदेश दिया है कि अर्थदंड की वसूली सुनिश्चित की जाए। वसूली की जानकारी सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही अपीलकर्ता को दो सप्ताह के भीतर सारी सूचनाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
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