मुरादाबाद : रामगंगा नदी में उफान, महानगर से इमलाक गांव का संपर्क टूटा
शाहबाद को जोड़ने वाले रास्ते पर भरा पानी, आवाजाही में दिक्कत, देवापुर में कई घरों तक पहुंचा नदी का पानी, किसानों की फसलें बर्बाद
मुरादाबाद, अमृत विचार। उत्तराखंड में हो रही बारिश से यहां रामगंगा नदी भी उफान पर है। गुरुवार को नदी में पानी कुछ कम हुआ, लेकिन लोगों की दुश्वारियां बरकरार रहीं। पानी भरने से महानगर से सटे इमलाक गांव का संपर्क कट गया है और शाहबाद को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते पर करीब ढाई फिट पानी भरने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। देवापुर गांव में कई घरों तक पानी पहुंच गया। इसके अलावा किसानों की गन्ना, धान और हरे चारे की फसल को नुकसान हुआ है। मूंढापांडे क्षेत्र में भी कोसी नदी की वजह से हरपालनगर और रनियाठेर गांव में पानी भरने से लोगों को परेशानी हो रही है।
मूंढापांडे ब्लॉक के गांव देवापुर, इमलाक, मछरिया, हृदयपुर, कल्याणपुरा गांव के अलावा दूसरे कई गांवों के लोग नदी का पानी भरने की आशंका जता हैं। गुरुवार दोपहर देवापुर गांव में बहुत से ग्रामीण गांव के बाहर खड़े थे और फसलों में भरे पानी को देखकर परेशान थे। देवापुर निवासी सुशील कुमार के घर के पास तक पानी भरा है। उनका कहना है कि इससे हर समय सांप और जहरीले कीड़े आने का खतरा रहता है। एक दिन पहले सांप आ भी गया। रात को सोते हैं तो पता नहीं कब पानी आ जाए। सुबह को पानी कुछ कम मिलेगा तो शाम होते ही पानी बढ़ जाता है।
अनिल कुमार ने बताया कि उनकी 6 बीघा धान की फसल नदी के पानी में डूबकर खराब हो गई। महानगर से इमलाक गांव को जाने वाले रास्ते से सैकड़ों लोग निकलते है, लेकिन अब इनके सामने दिक्कत खड़ी हो गई है। लोगों के दो पहिया वाहन पानी में बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों ने नदी का पानी बढ़ने से खतरा बताया है। हालांकि बाढ़ खंड विभाग के कर्मचारी गुरुवार को भी नदी के पानी से मिट्टी का कटान रोकने में जुटे रहे।
हर साल बाढ़ आती है। प्रशासन को कोई स्थायी इंतजाम करना चाहिए। पांच बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। अगस्त में ही पांच बार पानी आया है। देवापुर गांव के जंगल में दूर-दूर तक पानी भरा है। अब पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था में दिक्कत आ रही है। - अरविंद सैनी
इमलाक गांव को जोड़ने वाले रास्ते पर पानी भरने से आवाजाही में दिक्कत हो रही है। महानगर से भी संपर्क कटा हुआ है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सात बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। नदी किनारे बांध बनवाया जाए। फसलों के नुकसान का मुआवजा मिले। सोनू वर्मा
महानगर के मोहल्ले के लोग सहमे, बाढ़ चौकियां अलर्ट
मुरादाबाद। रामगंगा नदी में पानी बढ़ने से महानगर के कई मोहल्लों के लोग भी सहमे हैं। इन लोगों को घरों में घुसने की चिंता सता रही है। नवाबपुरा, वारसीनगर और लालबाग में घरों की दीवारों से सटकर पानी बह रहा है। गुरुवार को रामगंगा नदी का जलस्तर 190.40 मीटर दर्ज किया गया। नदी के उस पार खेती करने वाले किसानों को भी दिक्कत हो रही है।
रामगंगा नदी किनारे स्थित गंगा मंदिर की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। वहां पर मौजूद लोग जितेंद्र और कमल ने बताया कि मंदिर तक 10 सीढ़ी हैं। आठ सीढ़ियां पानी में डूबी हैं, जबकि दो दिन पहले पूरी सीढ़ियां पानी में थी। महानगर के कई मोहल्ले नदी किनारे बसे हैं। इन लोगों को भी हर समय बाढ़ का खतरा सताता है।
जिगर कॉलोनी, बंगलागांव में भी पानी घरों के नजदीक तक पहुंच गया। सहायक अभियंता बाढ़ खंड सुभाषचंद्र ने बताया कि गुरुवार सुबह रामगंगा नदी का जलस्तर 190.40 मीटर रहा, जबकि दो बजे नदी का जलस्तर घटकर 190.31 मीटर रह गया। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। खो बैराज में पानी अधिक होने पर रामगंगा नदी में छोड़ दिया जाता है,जिससे पानी बढ़ जाता है। सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर रखा है।
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