पीलीभीत: डॉक्टरों में नहीं छूट पा रही लेटलतीफी की आदत, मरीजों पर बरस रही आफत...जानिए मामला
पीलीभीत, अमृत विचार। एक तरफ बीमारियां पैर पसार रही है। आई फ्लू के बाद मलेरिया और डेंगू ने दस्तक दे दी है। मरीज भी सामने आ रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अफसर तमाम दावे करते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसका असर धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा। आलम यह है कि तमाम स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिनमें घंटों इंतजार करने के बाद भी मरीज को दवा मुहैया नहीं हो पा रही। इसकी वजह है डॉक्टरों का समय पर ना पहुंचना। सख्ती के बाद भी इस लापरवाह रवैये को बदला नहीं जा सका है।
वैसे तो लंबे समय से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। स्टाफ और संसाधनों की कमी बनी हुई है। कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने के खेल से जुड़ी शिकायतें भी होती रही हैं। मगर, इन दिनों बीमारियों की दस्तक को देखते हुए अधिकारियों ने मातहतों को संजीदगी बरतने के निर्देश दिए हैं।
दोपहर दो बजे तक मरीजों को देखने का समय निर्धारित है। इसके बावजूद डॉक्टरों के समय से न पहुंचने की वजह से दिक्कत बनी हुई है। मरीज स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो डॉक्टरों के न होने की वजह से पहले इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो मरीज बिना दवा लिए ही लौट जाते हैं।
जिसके बाद ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप या फिर निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है। जिससे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। अमृत विचार की टीम ने कुछ केंद्रों पर पहुंचकर हकीकत परखी तो मरीज इंतजार करते मिले या फिर बैरंग लौट रहे थे। जिससे दावों पर तमाम सवाल खड़े हो गए।
बता दें कि कस्बा गरौला में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत होने पर मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद थी। यहां पर संविदा पर एक महिला चिकित्सक की तैनाती है। आरोप है कि महिला चिकित्सक अधिकांश दिन समय पर नहीं पहुंचती। मरीज तो सुबह नौ बजे से आना शुरू हो जाते हैं, लेकिन उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। मरीजों की मानें तो कभी-कभी दो पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी बैरंग लौटना पड़ता है। मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। कभी डाक्टर मिल जाएं तो दवा के न होने की बात कह दी जाती है।
दृश्य दो: राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय दहगला
शहर से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय दहगला का हाल भी कुछ ऐसा ही था। वहां पर एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट समेत तीन का स्टाफ है। आसपास के कई गांव के मरीज भी दवा लेने पहुंचते हैं। अस्पताल तक पहुंचने का एक तो रास्ता पहले से खराब, उसके बाद वहां पहुंचने के बाद भी मरीज वापस हो रहे थे।
डॉक्टर चिकित्सालय में नहीं थे। फार्मासिस्ट का कहना था कि डॉक्टर साहब तो सुबह आकर उपस्थिति भरकर मुख्यालय काम से चले गए। यह भी बताया कि पुराने पर्चे वाले मरीजों को उनके द्वारा दवा दे दी गई थी। बाकी जो नए मरीज आए थे, उन्हें वापस कर दिया था।
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