बाढ़ का खतरा: टापू बने बिंदकी फारम व बेनीखेड़ा, हजारों बीघा खेती जलमग्न, ग्रामीणों के चेहरे पर छाई मायूसी
फतेहपुर में बाढ़ का खतरा।
फतेहपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ने से ग्रामीणों के चेहरे पर मायूसी छा गई। लगातार गंगा के बढ़ते वेग से दोनों गांव के हालात बेपटरी की राह। अब तक नदिया के दरिया में हजार बीघा खेती जलमग्न हो चुकी है।
फतेहपुर, अमृत विचार। गंगा के बढ़ते जलस्तर से कटरी में खतरे की घंटी तेज हो चली है। हालांकि अभी बिंदकी फारम व बेनीखेड़ा गांव ही बाढ़ के पानी से चहुंतरफा घिरे हैं लेकिन जो हालात बन रहे हैं। उससे बाढ़ प्रभावित एक एक गांव का भी जल्द टापू बनना तय नजर आ रहा है। हाल यह है कि इन दोनों गांव तक पहुंचने के लिए मौजूदा वक्त एक मात्र जरिया नाव है। अभी तक करीब हजार बीघा कटरी की खेती, जलमग्न हो चुकी है। जिस तेजी से पानी बढ़ता जा रहा है। उससे एक दो दिन में नुकसान की गिरफ्त में आने वाली खेती की तादाद दूनी हो सकती है।
गंगा में खतरे का निशान भिटौरा गेज के लिहाज से 100.86 मीटर पर है। शनिवार की रीडिंग में इसे 101.06 मीटर रिकार्ड किया गया। यह हालात पहाड़ी इलाकों में होने वाली जबरदस्त बारिश के कारण बने हैं। जिससे विभिन्न बैराज से रोजाना छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी की वजह से बिंदकी तहसील क्षेत्र की कटरी जद में आती जा रही है।
गंगा नदी के बढ़ते पानी ने अब तक बिंदकी फारम व बेनीखेड़ा को चारों तरफ से अपनी जद में ले लिया है। जाड़े का पुरवा भी धीरे धीरे इसी राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। इस गांव को भी किसी भी सुबह गंगा की जलधारा के बीच टापू बना देखा जा सकता है।
स्कूल बंद, बाहर भी पढ़ने नहीं जा रहे विद्यार्थी
गंगा के खतरे के निशान को पार करने से बिंदकी फारम व बेनीखेड़ा के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इन दोनों गांव से करीब सवा दो सौ विद्यार्थी वास्ता रखते हैं। जिनकी तालीम पर बाढ़ के पानी का फिलहाल ग्रहण लगा हुआ है। तमाम विद्यार्थी, इन गांवों से औंग व बड़ाहार के स्कूल कालेज नहीं आ पा रहे हैं।
