संभल: दहेज हत्या में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास, थाना रजपुरा क्षेत्र का मामला

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एडीजे प्रथम की अदालत ने सुनाई सजा

संभल/चन्दौसी, अमृत विचार। अदालत ने दहेज हत्या में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा दण्डित किया है। मामला थाना रजपुरा क्षेत्र के गांव मलिकपुर का है। मुकदमा न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश /विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संभल स्थित चन्दौसी में विचाराधीन था। 

जिला मुरादाबाद के थाना बिलारी क्षेत्र के गांव विजयपुर निवासी पीड़ित पिता कैलाश ने मुकदमा अपराध संख्या 373/2018 अंतर्गत धारा 498ए, 304बी, 506 व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत थाना रजपुरा जिला संभल में राजेश कुमार व उसके पुत्र राहुल निवासी गण गांव मलिकपुर थाना रजपुरा के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया था।

 जिसमें बयां किया कि उसने अपनी बेटी रीना की शादी 19 जून 2018 को राहुल पुत्र राजेश कुमार निवासी गांव मलिकपुर थाना रजपुरा जिला संभल से हिंदू रीति रिवाज से की थी। शादी में हैसियत के अनुसार दान दहेज भी दिया था। शादी में 15 लाख रुपया खर्च हुआ था। शादी में दिए दान दहेज से ससुराल वाले खुश नहीं थे और स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग को लेकर रीना के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे। जिसके चलते रीना की एक अक्टूबर 2018 को अस्वभाविक परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृतका के ससुर राजेश कुमार द्वारा स्थानीय थाने पर इस आशय से सूचना दी गई कि आज एक अक्टूबर 2018 की सुबह साढ़े नौ बजे उसके पुत्र राहुल की पत्नी रीना ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली है। रीना अक्सर बीमार रहती थी।

 पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज कर व साक्ष्य जुटा कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मुकदमा न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश /विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संभल स्थित चन्दौसी में विचाराधीन चल रहा था। अभियोजन पक्ष से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने दलीलें पेश की और बहस की। बुधवार को मुकदमे पर सुनवाई करते हुए अशोक कुमार यादव द्वितीय न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश /विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संभल स्थित चन्दौसी में विचाराधीन चल रहा था। 

न्यायाधीश अशोक कुमार यादव द्वितीय ने बुधवार को मुकदमे पर सुनवाई करते हुए आरोपी राजेश कुमार व उसके पुत्र राहुल के धारा 304बी आईपीसी के अंतर्गत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया है। धारा 498ए के अ्ंतर्गत तीन-तीन वर्ष के कारावास व पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 506 में तीन-तीन वर्ष व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना, अर्थदण्ड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत दो वर्ष के कारावास व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं साथ चलेंगी।

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