बरेली: आमदनी का सवाल... नैनीताल हाइवे पर नहीं चलता फास्टैग
बरेली, अमृत विचार। केंद्र सरकार की ओर से सभी टोल प्लाजा पर फास्टैग अनिवार्य किए जाने के बावजूद नैनीताल स्टेट हाइवे पर दोहना और मुड़िया मुकर्रमपुर में बने टोल प्लाजा पर नकद टैक्स लिया जा रहा है। दोनों जगह अतिरिक्त वसूली के आरोप आम हैं। दोनों टोल प्लाजा पर इसी कारण नोकझोंक भी आम बात है।
दरअसल, ये दोनों टोल प्लाजा के बीच की दूरी सिर्फ 52 किमी है, इसलिए एक ही टोल प्लाजा पर टैक्स लिया जा सकता है लेकिन लोगों का आरोप है कि इससे अनजान लोगों से दोनों प्लाजा पर टैक्स की वसूली कर ली जाती है।
इन दोनों टोल प्लाजा पर फास्टैग लागू न करने के पीछे दो कारण बताए जा रहे हैं। उप्र स्टेट हाइवे अथारिटी के अफसरों का कहना है कि अक्टूबर 2015 में दोहना में पीएनसी कंपनी ने टोल टैक्स लेना शुरू किया था। साल 2020 में इसी कंपनी ने बहेड़ी के आगे मुड़िया मुकर्रमपुर में टोल प्लाजा बनाया था। दोनों प्लाजा के अनुबंध में फास्टैग का जिक्र नहीं था। अब केंद्र सरकार के निर्देश पर फास्टैग व्यवस्था लागू करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
हालांकि फास्टैग लागू न करने के पीछे असल खेल कार्यदायी संस्था की आमदनी का बताया जा रहा है। दोनों टोल के बीच दूरी सिर्फ 52 किलोमीटर है। अभी एक टोल की टैक्स की पर्ची दिखाकर दूसरे टोल से मुफ्त वाहन गुजर सकते हैं। आरोप है कि दूसरे जिलों के लोगों से दोनों टोल प्लाजा पर टैक्स वसूल कर लिया जाता है। चूंकि फास्टैग की व्यवस्था लागू होने पर यह अवैध कमाई बंद हो जाएगी, इसीलिए उसे लागू नहीं किया जा रहा है। फास्टैग से भुगतान की व्यवस्था न होने के कारण वाहनों को काफी-काफी देर टोल प्लाजा पर खड़े भी रहना पड़ता है।
स्टेट हाइवे अथॉरिटी के अधिकारियों ने तीन साल पहले पीएनसी कंपनी को फास्टैग लागू करने के निर्देश दिए थे लेकिन कंपनी ने अपने नुकसान का हवाला देकर इन्कार कर दिया था। उसका तर्क था कि टोल प्लाजा का निर्माण पीपीपी मॉडल के तहत हुआ है। इसके अनुबंध में फास्टैग से वसूली की शर्त नहीं थी। अब स्टेट हाइवे अथॉरिटी को कंपनी ने पत्र लिखा है कि दोनों टोल प्लाजा काफी पुराने हैं। फास्टैग व्यवस्था लागू करने के लिए सिस्टम में काफी बदलाव करने पड़ेंगे इसलिए स्टेट हाइवे अथॉरिटी नीति बनाकर भेजे ताकि उस पर काम शुरू कराया जा सके।
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