Ram Nath Kovind: Kanpur में पूर्व राष्ट्रपति बोले- चंद्रयान की सफलता से चीन समेत कई देश बेचैन होंगे, ये भी कहा
कानपुर में सीएसजेएमयू के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचें।
कानपुर में सीएसजेएमयू के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचें। इस दौरान उन्होंने कहा कि चंद्रयान की सफलता से चीन समेत कई देश बेचैन होंगे।
कानपुर, अमृत विचार। आज हम गर्व कर सकते हैं कि भारत ने चांद पर कदम रख दिया है। देश के वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि से पूरे विश्व में देश का मान बढ़ा है। खास बात यह है कि जहां विश्व के कई देश नहीं पहुंच सके, वहां पर हम लोगों ने कदम रख दिया है। वैज्ञानिकों की इस सफलता से भारत अंतरिक्ष अनुसंधान विज्ञान के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया है।
ये विचार पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को व्यक्त किए। वे पं. राम बालक मिश्र स्मृति समारोह में शिरकत करने शहर आए थे। रामकुटी फाउंडेशन की ओर से सीएसजेएमयू के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। समारोह में उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले दिग्गजों को ‘पं. राम बालक मिश्र शिरोमणि’ सम्मान से नवाजा गया।
समारोह के दौरान कोविंद ने कहा कि भारत के चांद पर कदम रखने से विश्व के कई देशों में बेचैनी भी बढ़ गई है। ऐसे में भारत की इस उपलब्धि पर यदि चीन जैसे देश का नेतृत्व कर रहे नेताओं के दिल पर हाथ रखा जाए तो पता लगेगा कि वे जरूर बेचैन हो गए होंगे। पूर्व राष्ट्रपति ने शिक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कहा कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए एक आम इंसान भी शक्तिशाली बन सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम इस बात का उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति मानविकी विषय और कौशल विकास के साथ शिक्षा को बढ़ावा देती है। शिक्षा अपनी राष्ट्रभाषा, संस्कृति और परिवेश के आधार पर होनी चाहिए। ये समावेश नई शिक्षा नीति में हुआ है। समारोह के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और महापौर प्रमिला पाण्डेय भी मौजूद रहीं।
शिक्षा नीति के लिए 8 लाख सुझाव
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय 8 से 9 लाख सुझाव सामने आए थे। उन्होंने कहा कि उस वक्त मैं राष्ट्रपति था और मुझे बताया गया था कि नीति को बनाने के लिए इनमें से लगभग दस हजार सुझावों को शामिल किया गया था।
पं. राम बालक मिश्र को किया याद
समारोह के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने पं. राम बालक मिश्र को भी याद किया। कहा कि वे अपनी मातृभाषा से बहुत प्रेम करते थे। आज यदि वे होते तो नई शिक्षा नीति को देख बहुत प्रसन्न होते। उन्होंने यह भी कहा कि पं. राम बालक मिश्र जी की कल्पना थी कि जनता को जनता की भाषा में न्याय मिले। आज न्यायालय की ओर से बहुत से निर्णय मातृभाषा में दिए जा रहे हैं। उन्होंने पं. राम बालक मिश्र जी की पंक्तियां ‘जो लोग गिरने से घबराते हैं, वे ऊंची उड़ान नहीं भरते’ भी सुनाईं।
भारत जल्द बनेगा तीसरी आर्थिक शक्ति
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता हूं कि सरकारों ने काम नहीं किया, लेकिन पिछले आठ-दस सालों में जिस ‘स्पीड’ से काम हो रहा है वह ‘स्पीड’ पहले होती तो हम बहुत पहले बदल गए होते। सरकारों ने पहले भी काम किए हैं, लेकिन दस सालों से काम की ‘स्पीड’ की वजह से आज हम पांचवीं आर्थिक शक्ति बन गए हैं। हमने इंग्लैड और जर्मनी जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। जल्द ही हम विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति बन जाएंगे।
परिवार के सदस्यों की तरह की मुलाकात
पूर्व राष्ट्रपति ने शहरवासियों से ऐसे मुलाकात की जैसे कोई अपने परिवार के सदस्यों से मिलता हो। मंच से उतरते ही उनकी ‘बॉडी लैंग्वेज’ में अचानक परिवर्तन आ गया। मंच पर बेहद गंभीर लेकिन मंच से नीचे उतरते हुए वे बेहद हंसमुख नजर आ रहे थे। लोगों से हाथ मिलाया, बातचीत की और कई बार तेजी से मुस्कुराए भी।
ये गण्यमान्य रहे मौजूद
समारोह के दौरान सांसद सत्यदेव पचौरी और सांसद देवेंद्र सिंह भोले, महापौर प्रमिला पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत मिश्र, समाज कल्याण विभाग राज्यमंत्री असीम अरुण, सीएसजेएमयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, डॉ. शिवाकांत मिश्र, बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्र, विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, समाजसेवी व उद्योगपति नरेंद्र शर्मा, डॉ. अंगद सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।
इनका हुआ सम्मान
समारोह के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने शिक्षा, चिकित्सा, विधि, उद्योग, सामाजिक क्षेत्र में अतुलनीय कार्य करने वाले दिग्गजों को सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक प्रो. भारत भास्कर, आईआईटी के निदेशक अभय करंदीकर, एनबीईएमएस के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत सेठ, आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार अग्रवाल, चांसलर ऑफ गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट डॉ. केएम अन्नामलाई, एम्स के डीन प्रो एम बाजपेई, लंग्स केयर फाउंडेशन के चीफ ट्रस्टी डॉ. प्रो. अरविंद कुमार, एमिनेंट न्यूरो सर्जन ऑफ इंडिया के प्रो. डॉ. रमेश चंद्र मिश्रा, आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, पूर्व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामनेशन इन मेडिकल साइंस के सदस्य डॉ. राकेश शर्मा, सीए दिनेश चंद्र शुक्ला, रिमझिम इस्पात के निदेशक योगेश अग्रवाल, समाज सेवी व नेत्र सर्जन डॉ अवध दुबे, जीएसवीएम के प्राचार्य डॉ. संजय काला, सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक, सीबीआईसी के पूर्व सदस्य डॉ. एसके पांडा, मिर्जा टेनर की चेयरपर्सन इरम मिर्जा, आचार्य सलिल, विष्णु बिहारी तिवारी, पंडित समूह के चेयरमैन विजय कुमार पांडेय, प्रबोल नियोगी, तिरंगा समूह के निदेशक और समाजसेवी नरेंद्र शर्मा, डेन समूह के संजीव दीक्षित, डॉ. पीयूष मिश्रा, ब्रजेंद्र राही, चंदरधर मिश्र, रामनारायण राहू, मानस संगम के संस्थापक बद्रीनारायण तिवारी।
