Chitrakoot News : स्कूल को सरकारी बनाने के लिए अनशन पर बैठे शिक्षक-कर्मचारी

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Edited By Amrit Vichar
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चित्रकूट में स्कूल को सरकारी बनाने के लिए अनशन पर बैठे शिक्षक-कर्मचारी।

चित्रकूट में स्कूल को सरकारी बनाने के लिए अनशन पर शिक्षक-कर्मचारी बैठे। श्री तुलसी प्रज्ञाचक्षु दिव्यांग उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला।

चित्रकूट, अमृत विचार। अपने स्कूल को सरकार को हस्तांतरित करने की मांग को लेकर श्री तुलसी प्रज्ञाचक्षु दिव्यांग उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कामता चित्रकूट (सतना) के शिक्षक और कर्मचारी अनशनरत हैं। इनका कहना है कि विद्यालय प्रंबधन की वजह से सारी प्रक्रिया होने और जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आश्वासन मिलने के बाद भी उनके स्कूल को सरकार को नहीं दिया गया।

गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने क्षेत्र में दिव्यांगों की शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। दिव्यांग विश्वविद्यालय एक ऐसी नजीर है, जिसने देश में ही नहीं विदेश में भी नाम किया है। जगद्गुरु के प्रयासों के बाद हाल ही में इसे सरकारी दर्जा प्राप्त हुआ है। उधर, चित्रकूट मप्र क्षेत्र अंतर्गत कामता में भी जगद्गुरु ने उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खोला और आज भी वहां भी दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई जारी है।

हाल ही में इस श्री तुलसी प्रज्ञाचक्षु दिव्यांग उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के भी सरकार के आधीन होने को लेकर खबरें चली थीं। विद्यालय की प्रधानाचार्या निर्मला वैष्णव ने बताया कि इस संबंध में लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं। पंद्रह अगस्त को जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस बात की घोषणा भी की कि यह अगले साल सरकारी हो जाएगा और यहां ग्रामोदय विवि के कुलपति झंडारोहण करेंगे।

प्रधानाचार्या का आरोप है कि अगले ही दिन जगद्गुरु का मन बदल गया और इसके पीछे विद्यालय समिति के उपाध्यक्ष रामचंद्र दास उर्फ जय मिश्रा और सुरक्षा अधिकारी मनोज पांडेय का हाथ है।

उन्होंने कहा कि जगद्गुरु ने उनसे कहा कि वह उनको (निर्मला वैष्णव) आजीवन यहां की प्रधानाचार्या रहने देंगे पर विद्यालय को सरकार को नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि पहले तो उन्होंने इसकी स्वीकृति दे दी पर बाद में शिक्षकों-कर्मचारियों और छात्रों के दीर्घकालीन हित को देखते हुए मना कर दिया।

इसके बाद 20 अगस्त से शिक्षकों और कर्मचारियों ने विद्यालय गेट के पास धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। राजेंद्र प्रसाद पटेल, गरुण कुमार मिश्रा, वीर सिंह सेंगर, प्रेमलाल मिश्र, संदीप त्रिपाठी आदि का कहना है कि उन लोगों की मांग है कि मप्र शासन विद्यालय को अपने संरक्षण में ले। 

जो लिखना हो लिख दो- मनोज पांडेय

उधर, इस संबंध में जब जय मिश्रा का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कई बार रिंग करने के बाद भी उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया। मनोज पांडेय ने पूरे मामले की जानकारी से ही इंकार किया। उन्होंने कहा कि उनको कुछ पता नहीं। जो लिखना हो लिख दो।  

जगद्गुरु से नहीं है कोई शिकायत

यहां एक बात उल्लेखनीय है कि अनशनरत शिक्षकों-कर्मचारियों को तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य से कोई शिकायत नहीं है। इनका कहना है कि जगद्गुरु ने उन लोगों का सदैव हित चाहा है और इस वजह से ही वे लोग पढ़-पढ़ा पा रहे हैं। संतहृदय जगद्गुरु ने ही उनको सरकार के संरक्षण में विद्यालय देने का आश्वासन भी दिया।

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