Kanpur: कार्डियोलॉजी में हाइब्रिड ऑपरेशन की तैयारी, संस्थान ने बनाया प्रस्ताव, डॉक्टर और सर्जन मिलकर करेंगे सर्जरी
कानपुर के कार्डियोलॉजी में हाइब्रिड ऑपरेशन की तैयारी।
कानपुर के कार्डियोलॉजी में हाइब्रिड ऑपरेशन की तैयारी। संस्थान ने प्रस्ताव बनाया। मेडिसिन के डॉक्टर और सर्जन मिलकर सर्जरी करेंगे।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। लक्ष्मीपत सिंघानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) में जल्दी ही हाइब्रिड ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो सकती है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। मंजूरी मिलने पर कार्डियोलॉजी प्रदेश का पहला संस्थान होगा, जहां हाइब्रिड ऑपरेशन किया जाना संभव हो सकेगा। इस तकनीक का इस्तेमाल अत्यधिक जटिल मामलों में किया जाता है।
प्रस्ताव के अनुसार कार्डियोलॉजी में हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर और लेजर तकनीक पर आधारित उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इनकी मदद से कार्डिक मेडिसिन और कार्डिक सर्जन मिलकर ऑपरेशन कर पाएंगे। अभी ऐसी तकनीक बेंगलुरु, मुंबई, और दक्षिण भारत के कुछ बड़े शहरों में उपलब्ध है। चिकित्सा क्षेत्र तेजी से उन नई तकनीकों को अपना रहा है, जिसमें मरीजों की जान को कम खतरा हो और वह जल्द स्वस्थ हो सकें।
इसे देखते हुए ही कई मामलों में डॉक्टरों का पैनल सर्जरी करता है। हालांकि यह सभी जगह संभव नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर जरूरी है, जिसमें मरीजों के उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गुर्दा या लिवर की समस्या पर भी नियंत्रण रखा जा सके। चिकित्सकों के मुताबिक सबसे अधिक जटिलता दिल के रोगियों के आपरेशन में होती है। दिल की नसों का ब्लॉकेज दूर करने या बैलूनिंग और वॉल्व प्रत्यारोपण एक साथ करने की प्रक्रिया हाइब्रिड सर्जरी के अंतर्गत आती है। इसमें बाइपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी भी एक ही समय पर की जा सकती है।
नए सिरे से तैयार होगा ऑपरेशन थिएटर
कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा के मुताबिक हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर की संरचना नए सिरे से की जाएगी। इसके लिए पूरा सिस्टम बदलेगा। पूर्व के माड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की जगह अत्याधुनिक हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर बनेगा। इसे इमरजेंसी या आईसीयू के पास ही बनाया जाएगा। किसी भी तरह के गंभीर रोगियों के आने पर उनके ऑपरेशन की जल्द प्लानिंग हो सकेगी। हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर के साथ ही लेजर तकनीक के उपकरण लाए जाएंगे। अभी यह प्रदेश में कहीं भी विकसित नहीं है।
लेजर से दूर होगा कोरोनरी आर्टरी में जमा कैल्शियम
कोरोनारी आर्टरी (हृदय की मुख्य धमनियां) में लंबे समय तक फैट और कोलेस्ट्राल जमा होने से कैल्शियम भी उसमें रुकने लगता है। यह स्थिति एथेरोक्लेरोसिस कहलाती है। इसमें धमनियां मोटी हो जाती हैं। यह ऑक्सीजन और खून के बहाव को प्रभावित करती है। इससे दिल का दौरा पड़ता है। प्रो. वर्मा ने बताया कि सामान्य एंजियोप्लास्टी से कैल्शियम दूर नहीं किया जा सकता है। मौजूदा समय में रोटे ब्लेटर तकनीक अपनाई जा रही है, लेकिन इससे भी अधिक एडवांस लेजर तकनीक आ गई है। इसमें आसानी से कैल्शियम को निकाला जा सकता है।
