10 साल बाद मां को मिल गया जिगर का टुकड़ा, गुम हुए बेटे को लेने आ गई बरेली
चंडीगढ़ में इलाज के दौरान पीजीआई की छत से कूदकर भाग गया था
बरेली, अमृत विचार। 10 साल बाद लापता बेटे को पाकर मां की आंखें नम हो गईं। भाई के खोने के गम में चार साल तक बहन ने इंतजार किया और शादी नहीं की थी। चंडीगढ़ निवासी खैरुन ने बताया कि 22 मई 2013 को वह अपने बेटे मोहसिन का मानसिक इलाज कराने चंडीगढ़ के पीजीआई लेकर गईं थीं। वह वहीं से छत से कूदकर भाग गया था।
गुमशुदगी की रिपोर्ट मनीमाजरा पुलिस थाना में दर्ज कराई थी। पिता की मौत के बाद घर पर छोटी बहन और मां थीं। मोहसिन की बहन ने अपनी शादी इसलिए नहीं की कि इकलौता भाई है, वह जब आएगा तभी शादी करूंगी लेकिन चार साल बीत गए, मोहसिन घर नहीं लौटा। जिसके बाद 2017 में उसकी बहन ने शादी कर ली, लेकिन मां बेटी ने मोहसिन के आने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
मोहसिन के बहनोई ने अक्टूबर 2018 में मोहसिन खो जाने की सूचना फेसबुक पर भी शेयर की, लेकिन उसके बाद भी वह नहीं मिल सका। 7 जून 2023 को मोहसिन किला पुल के पास मानसिक मंदित हालत में मिला। जिसके बाद उसे टीम मनो समर्पण ने रेस्क्यू कर रजऊ परसपुर स्थित मनो समर्पण पुनर्वास केंद्र में शिफ्ट किया।
इलाज के बाद ठीक होने पर मोहसिन ने अपना नाम के साथ पता बताया तो मनो समर्पण संस्था के फाउंडर और मनोवैज्ञानिक शैलेश शर्मा ने चंड़ीगढ़ के मनीमाजरा पुलिस थाना में संपर्क किया और मोहसिन के बताए पते पर उसके परिजनों को तलाशने का आग्रह किया। शैलेश शर्मा ने बताया कि सोमवार को उसकी मां और बहन उसे लेने के लिए बरेली पहुंचे। 10 साल बाद बेटे को देखकर दोनों के खुशी के आंसू निकल आए।
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