Kanpur News: एक ऐसा एप… जिससे पुलिस थाने में बैठ कर व्यक्ति का कर सकती सत्यापन, इस तरह से होता काम
कानपुर में अब चुटकियों में कराएं पुलिस वेरीफिकेशन।
कानपुर में एसईई एप के जरिए पुलिस थाने में बैठे-बैठे ही कुछ घंटे में किसी भी व्यक्ति का सत्यापन कर सकती है। इस एप से जुड़े हैं देश के हर कोने में रहने वाले लोग, जो सत्यापन के काम में पुलिस की मदद करते हैं।
कानपुर, [कुशाग्र पांडेय]। सुतरखाना रोड स्थित सिद्धार्थ होटल संचालक ने पुलिस वेरीफिकेशन के बिना सूर्यदेव गुप्ता नामक युवक को नौकरी पर रख लिया। नौकर होटल में रखे करीब साढ़े चार लाख रुपये और खुद की आईडी लेकर भाग गया। संचालक ने सूर्यदेव के खिलाफ थाने में रिपोर्ट तो दर्ज करा दी, लेकिन होटल संचालक के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है। जिससे सूर्यदेव की पहचान की जा सके। अगर होटल संचालक ने सूर्यदेव का पुलिस वेरीफिकेशन कराया तो यह नौबत नहीं आती।
यह मामला तो बानगी भर है। शहर में सैकड़ों लोग इस तरह की लापरवाही से चोरी या दूसरी आपराधिक वारदात के शिकार हो जाते हैं। इसलिए अगर आप नौकर, चौकीदार या किसी को भी काम पर रख रहे हैं तो उसका पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएं। अब इस काम के लिए आपको बार-बार थाने का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है और न आपको कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा।
पुलिस अब ‘एसईई’ एप के जरिए कुछ ही घंटे में किसी भी व्यक्ति का वेरीफिकेशन कर देती है। यह एप आम जनता के लिए नहीं है। इसे सिर्फ पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों के लिए बनाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी व्यक्ति की कुछ ही घंटों में कुंडली खंगाली जा सके।
इस तरह काम करता है ‘एसईई’ एप
‘एसईई’ एप से देश के हर कोने में रहने वाले लोग जुड़े हैं। हर मोहल्ले के कुछ लोगों के साथ वार्ड के पार्षद और विधायक के नंबर इस एप में दर्ज हैं। जब पुलिस को किसी का वेरीफिकेशन करना होता है तो पुलिस उस व्यक्ति की कोई न कोई आईडी लेती है। इसके बाद पता देखकर एप के जरिए उस मोहल्ले के लोगों से फोन करके संपर्क किया जाता है और आईडी भेजकर संबंधित लोगों को युवक के घर भेजकर यह तस्दीक किया जाता है कि युवक वहां रहता है या नहीं। इस एप से देश के सभी थाने भी जुड़े हैं।
पुलिस युवक का आपराधिक रिकार्ड चेक करने के लिए उसकी आईडी एप में पोस्ट करती है। थानेदार पोस्ट की गई आईडी का थाने के रिकार्ड से मिलान करते हैं। अगर किसी भी थाने में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज होती है, तो जानकारी सामने आ जाती है। यह काम कुछ ही घंटे में पूरा हो जाता है। इस तरह पुलिस थाने में ही बैठे-बैठे किसी भी व्यक्ति का वैरीफिकेशन कर सकती है।
नौकरी देने, किरायेदार रखने पर कराएं पुलिस वेरीफिकेशन
सहायक पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी का कहना है कि अगर आपको किरायेदार अथवा किसी को नौकरी में रखना हैं तो उसका पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएं। इससे आपको पता चल जाता है कि आप जिसको नौकरी में रख रहे हैं, या मकान किराये पर दे रहे हैं, वह किस तरह का व्यक्ति है। वेरीफिकेशन से आपको युवक के चरित्र का पता चल जाता है। पुलिस वैरीफिकेशन कराने से आप धोखे से बच सकते हैं।
