Banda के हॉकी खिलाड़ियों के कायल हो गए थे मेजर ध्यानचंद्र, बुजुर्ग हॉकी खिलाड़ी ने सुनाए संस्मरण

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Edited By Amrit Vichar
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बांदा के हॉकी खिलाड़ियों के कायल हो गए थे मेजर ध्यानचंद्र।

बांदा के हॉकी खिलाड़ियों के मेजर ध्यानचंद्र कायल हो गए थे। हॉकी के जादूगर का बांदा से विशेष लगाव था। पूरे मैच के दौरान नहीं गोल लगा पाए थे।

बांदा, [पवन तिवारी]। शायद यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि हाकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद्र भी बांदा के हॉकी खिलाड़ियों के कायल हो गए थे। पूरे विश्व में अपनी हॉकी का जलवा बिखरने वाले मेजर ध्यानचंद्र की यहां के हाकी खिलाड़ियों ने उनकी ऐसी घेराबंदी की कि वह गोल मारने को तरस गए।

मेजर के साथ मैच खेल चुके यहां के बुजुर्ग हाकी खिलाड़ी सैय्यद मोहम्मद इलियास मगरबी बताते हैं कि वर्ष 1956 में मेजर नवाब मेमोरियल हाकी टूर्नामेंट में झांसी टीम में खिलाड़ी के रूप में पहली बार बांदा आए। यहां राइफल क्लब ग्राउंड में उनकी टीम का मुकाबला बांदा की हॉकी टीम से हुआ। श्री मगरबी बताते हैं कि उन दिनों बांदा की टीम भी लोहा मनवाए थी।

बांदा के खिलाड़ी मन्नान, याकूब और कतील बांदवी ने फील्ड में ऐसी घेराबंदी की थी, कि मेजर ध्यानचंद्र एक अदद गोल मारना तो दूर गेंद के साथ ‘डी’के पास पहुंचने को तरस गए। खेल बिना हार-जीत के खत्म (ड्रॉ) हो गया। मेजर ने बांदा के खिलाडियों की पीठ थपथपाई थी। श्री मगरबी ने बताया कि मेजर ध्यानचंद्र 1967 में दूसरी बार नवाब मेमोरियल हाकी टूर्नामेंट में आए लेकिन मैच के मुख्य अतिथि बनकर।

उनके साथ पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और छोटे भाई रूप सिंह भी साथ आए थे। बांदा और यहां के लोगों के प्रति ध्यानचंद्र का विशेष लगाव था। बांदा खिलाड़ी जफर, कमतू पांडेय और राही बाबू उनके खास मित्रों में थे। श्री मगरबी बताते हैं कि पूर्व ओलंपियन और उनके पुत्र अशोक कुमार की शादी का निमंत्रण पत्र भेजकर उन्होंने इन खास मित्रों को शादी में विशेष रूप से आमंत्रित किया था। 

मेजर के नाम पर हो राइफल क्लब मैदान

राइफल क्लब बचाओ समिति के राजेंद्र अवस्थी ने राइफल मैदान को मेजर ध्यानचंद्र मैदान घोषित किए जाने की मांग की। कहा है कि हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद्र को सही मायने में उनके नाम से मैदान घोषित किया जाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने जिला प्रशासन, सदर विधायक समेत अन्य जन प्रतिनिधियों से मैदान के संरक्षण का अनुरोध किया। कहा कि कुछ तथाकथित लोग मैदान में कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। प्राइवेट बस संचालक और चैकी पुलिस द्वारा पकड़े गए वाहनों को मैदान परिसर में खड़ा कराए जाने से ग्राउंड लगातार खराब होता जा रहा है। बताया कि इसी मैदान पर हाकी के जादूगर ने अपनी हॉकी की कला दिखाई थी। 

मैदान की दुर्दशा पर खिलाड़ियों में नाराजगी

लगभग 56 साल पहले जिस राइफल क्लब मैदान पर मेजर ध्यानचंद्र ने अपनी हाकी का जलवा बिखेरा था, आज वही मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। राइफल क्लब बचाओ समिति के राजेंद्र अवस्थी ने बताया कि पूरा ग्राउंड गंदगी से पटा पड़ रहता है। नगर पालिका द्वारा कभी भी सफाई नहीं कराई जाती। श्री अवस्थी के मुताबिक अब प्रशासन इस ऐतिहासिक ग्राउंड पर कांप्लेक्स बनाने की तैयारी कर रहा है। जनप्रतिनिधियों की खामोशी और मैदान की दुर्दशा को लेकर खिलाड़ियों में जबर्दस्त नाराजगी है।

 

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