महिलाओं का दंगल: Hamirpur में अखाड़े में भिड़ी घूंघट वाली महिलाएं, रोमांचक कुश्ती में दिखाए दांवपेंच
हमीरपुर में अखाड़े में घूंघट वाली महिलाएं भिड़ी।
हमीरपुर में अखाड़े में घूंघट वाली महिलाएं भिड़ी। रोमांचक कुश्ती में बुजुर्ग महिलाओं ने दांवपेंच दिखाए।
हमीरपुर, अमृत विचार। जिले में सैकड़ों साल पुरानी परम्परा के तहत महिलाओं का दंगल हुआ। जिसमें घूंघट वाली महिलाओं की कुश्ती देखने को महिलाओं की भारी भीड़ जुटी। अंग्रेजों के जमाने से चल रहे महिलाओं के दंगल में एक दर्जन कुश्तियां हुई। जिसमें कई बुजुर्ग महिलाओं के दांवपेंच देख महिलाएं वाह-वाह कर उठी।
मुस्करा क्षेत्र के लोदीपुर निवादा गांव में महिलाओं के बीच अनोखा दंगल सैकड़ों सालों से चल रहा है। रक्षाबंधन त्योहार की शाम अखाड़े में घूंघट वाली महिलाओं ने खूब दांवपेंच दिखाए। महिलाओं का दंगल बुन्देलखंड और आसपास के किसी भी जिले में नहीं होता है, लेकिन यहां सैकड़ों साल पुरानी परम्परा का निर्वहन आज भी महिलाएं कर रही हैं। आज के दौर में महिलाएं पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नही है। चाहे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक लाना हो या राजनीति हो, सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों से चार कदम आगे है।
दंगल में एक दर्जन महिलाओं की कुश्तियां कराई गईं। जिसमें कुसमा, सुनीता, श्यामा, रामाश्री, प्यारी, ज्ञानवती, माया वर्मा, राजा बेटी, भूरी कुशवाहा, कैलशिया, राजकुमारी सहित तमाम घूंघट वाली युवा व बुजुर्ग महिलाओं ने अखाड़े में एक दूसरे को पटकनी दी। गांव की प्रधान गिरजा देवी ने महिलाओं के दंगल का शुभारंभ कराया। बाद में सरपंच ने विजयी महिलाओं को पुरस्कृत भी किया।
आजादी के पहले से चल रहा है महिलाओं का दंगल
प्रधान गिरजा देवी ने बताया कि गांव में आजादी से पहले महिलाओं का दंगल हो रहा है। हर साल रक्षाबंधन त्योहार में दंगल की धूम मचती है। बताया कि महिलाओं का दंगल कोई भी पुरुष देख नहीं सकता। उनके दंगल के आसपास प्रवेश करने पर प्रतिबंध रहता है। पुरुषों पर नजर रखने के लिए दंगल के आसपास लट्ठमार महिलाएं मुस्तैद रहती है।
आत्मरक्षा के लिए दंगल में महिलाओं ने सीखे दांवपेंच
गांव के बुजुर्ग जगदीश चन्द्र व एनआर वर्मा समेत तमाम बुजुर्गों ने बताया कि गांव में महिलाओं का दंगल अंग्रेजी हुकूमत से पहले शुरू हुआ था। उस जमाने में गांव की महिलाएं अत्याचार का सामना करने के बजाय इधर उधर डर के मारे छिप जाती थी। बताया अंग्रेजी हुकूमत में भी आत्मरक्षा के लिए महिलाओं ने दंगल में दांवपेंच सीखे थे। तभी से महिलाओं के दंगल कराने की परम्परा पड़ी। बताया इस अनोखे दंगल की विशेषता है कि दंगल के दिन सिर्फ महिलाएं ही अखाड़े के आसपास दिखती हैं। जबकि पुरुषों की इन्ट्री पर वैन रहता है। महिलाओं के दंगल में परम्परा के अनुसार बुजुर्ग महिला ही अखाड़े में ढोल बजाती है।
