भारतीय छात्र ने खोजा हिमालय क्षेत्र का वायु विक्षोभ स्थिरांक

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नई दिल्ली। आर्यभट्ट प्रेक्षा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस) के पीएचडी छात्र ने मध्य हिमालय क्षेत्र में पहली बार वायु विक्षोभ के स्थिरांक की सही-सही गणना की है जिससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के साथ ही विमान दुर्घटनाओं को कम करने में भी मदद मिलेगी। वायु विक्षोभ स्थिरांक किसी भी क्षेत्र में मौसम की भविष्यवाणी …

नई दिल्ली। आर्यभट्ट प्रेक्षा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एआरआईईएस) के पीएचडी छात्र ने मध्य हिमालय क्षेत्र में पहली बार वायु विक्षोभ के स्थिरांक की सही-सही गणना की है जिससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के साथ ही विमान दुर्घटनाओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।

वायु विक्षोभ स्थिरांक किसी भी क्षेत्र में मौसम की भविष्यवाणी के लिए महत्वपूर्ण है। इसी से तय होता है कि उस क्षेत्र विशेष में हवा की गतिविधियां किस प्रकार की रहती हैं। दक्षिण भारत के लिए यह स्थिरांक पहले से पता था लेकिन मध्य हिमालय क्षेत्र के लिए अब तक अनुमानित स्थिरांक के आधार पर गणना की जाती थी। अब सही-सही स्थिरांक का पता चलने से इस क्षेत्र में वायु विक्षोभ तथा मौसम का अनुमान बेहतर होगा।

साफ मौसम के बावजूद वायु विक्षोभ के कारण कभी-कभी हवा का दबाव अचानक कम होता है या बढ़ जाता है। विमानन के क्षेत्र में क्लियर-एयर टर्बुलेंस के नाम से जानते हैं। दबाव कम अचानक कम होने से विमान अचानक नीचे आता है जिससे हवाई दुर्घटनाओं की आशंका होती है, विशेषकर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में।

एआरआईईएस, नैनीताल के पीएचडी के छात्र आदित्य जायसवाल ने मध्य हिमालय क्षेत्र में क्षोभ मंडल के निचले स्तर के स्थिरांक की खोज की है। उन्होंने अपने प्राध्यापक डी.वी. फनी कुमार, एस. भट्टाचार्जी और मनीष नाजा की मदद से यह खोज की है जो रेडियो साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालय क्षेत्र में क्षोभ मंडल के निचले हिस्से का वायु विक्षोभ स्थिरांक पहले के अनुमान से कहीं अधिक है। इस अनुसंधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्ट्रेटोस्फीयर ट्रोपोस्फीयर राडार का इस्तेमाल किया गया।

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