Janmashtami 2023: सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, तीस वर्ष बाद बन रहा संयोग, जानें- सही डेट

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कानपुर में सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी।

कानपुर में सर्वार्थसिद्धि योग में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। तीस वर्ष बाद विशेष संयोग बन रहा है। इसमें भक्तों पर प्रभु की कृपा बरसेगी।

कानपुर, अमृत विचार। 6 सितम्बर को इस वर्ष जन्माष्टमी पर्व सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि इस बार बुधवार को बनने वाला योग इससे पूर्व 30 वर्षों पहले बना था। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सर्वार्थसिद्धि योग में पर्वकाल पड़ने और पूजन करने से परिवार में आने वाले संकट दूर होते हैं। 

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने जानकारी दी कि जन्माष्टमी पर्व पर इस बार चंद्रमा वृषभ राशि ,रोहिणी नक्षत्र, बुधवार होने से विशेष योग 30 सालों बाद निर्मित हुआ है। इसीलिए इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल देने वाली मानी जा रही है।

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उन्होंने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है।

चंद्रमा उच्च अंश पर होगा

ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी व संतोष पाधा ने यह भी बताया कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है और सर्वार्थ सिद्धि योग निर्मित हो रहा है। रोहिणी नक्षत्र 6 सितम्बर की सुबह 9.20 से 7 सितम्बर को सुबह 10. 25 तक रहेगा। रोहिणी को चंद्रमा की पत्नी माना जाता है और इस दिन चंद्रमा अपने उच्च अंश वृषभ राशि में होगा। ग्रहों की यह दशा पूजन अर्चन के योग से विशेष फलदायी सिद्ध हो रही है। सर्वार्थ सिद्धि योग में की गई पूजन अर्चना भक्तों को विशेष फल देती है।

गृहस्थ कब मनाएं जन्माष्टमी

ज्योतिषाचार्यों ने जानकारी दी कि गृहस्थ जीवन वालों के लिए 6 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार मनाना शुभ रहेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि का भी शुभ मुहूर्त बन रहा है। बाल गोपाल का जन्म मध्य रात्रि को हुआ था। इसी तरह स्मार्त संप्रदाय और वैष्णव संप्रदाय के लोग अलग-अलग दिन इसलिए जन्माष्टमी मनाते हैं क्योंकि दोनों संप्रदाय के लोग पंचांग में बताए अलग-अलग समय पर इस पर्व को मनाते हैं। स्मार्त संप्रदाय उदया तिथि को इतना महत्व नहीं देते हैं। जबकि वैष्णव संप्रदाय उदयकाल पर निर्धारित समय को मानते है। 

पूजा मुहूर्त व विधि

अष्टमी तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3.37 बजे से प्रारंभ होकर 7 सितंबर को शाम 4.14 बजे समाप्त होगी। जन्माष्टमी पूजन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11.44 बजे से 12.29 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की जाती है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण का शृंगार करने के बाद उन्हें अष्टगंध, चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाकर माखन मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पित करना शुभ माना गया है।

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