Kanpur Religion Conversion News: विदेशी फंडिंग से खूब फल-फूल रहा धर्मांतरण का खेल, यहां से भी जुड़े है तार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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विदेशी फंडिंग से खूब फल-फूल रहा धर्मांतरण का खेल।

विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण का खेल खूब फल-फूल रहा है। कानपुर और आसपास के जिलों में भी जड़े फैल रही हैं। सिंडिकेट और फंडिंग तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही।

कानपुर, अमृत विचार। धर्मांतरण के खेल में कानपुर ही नहीं उससे जुड़े आसपास के जिले भी धीरे-धीरे प्रभावित हो रहे हैं। कुछ मामलों में विदेशों से हो रही फंडिंग के भी साक्ष्य मिले, लेकिन पुलिस आज तक इनके सिंडिकेट तक नहीं पहुंच सकी। विदेशों से हो रही फंडिंग के गंभीर मामले पर भी कानून के रक्षक उदासीन बने हुए हैं।

इस पर गंभीरता से जांच नहीं की जा रही। लिहाजा हर महीने धर्मांतरण के नए मामलों को लेकर जोर-शोर से हल्ला मच रहा है। बात कानपुर कमिश्नरेट की करें तो पिछले नौ माह के भीतर छह धर्मांतरण के मामले अलग-अलग थानाक्षेत्रों से आ चुके है।

हिंदू संगठनों को ने हंगामा काटा तो मामले का खुलासा हुआ। कानपुर से जुड़े उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, सीतापुर, कन्नौज आदि जिलों से भी धर्मा्ंतरण के मामले सुर्खियों में रहते हैं। भोले भाले और गरीब तबके के लोगों को प्रलोभन और अंधविश्वास में लेकर ब्रेन वॉश कर धर्मांतरण की माला पहनाई जाती है। 

कोरिया, सीरिया, नेपाल से जुड़े हैं तार

पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि किराए का फ्लैट और लाखों रुपये महीने का खर्च विदेश की फंडिंग से होता है। दो मामलों में पकड़े गए आरोपियों ने जेल में बयान के दौरान कहा। इसके बाद जांच शुरू की गई तो उनसे जुड़े लोगों के अकाउंट डिटेल से जानकारी हुई। चकेरी के श्यामनगर मामले में फंडिंग की जड़ें कोरिया से जुड़े होने की बात सामने आई थी। इससे पहले घाटमपुर में पकड़े गए धर्मांतरण सिंडीकेट को सीरिया, नेपाल और कोलकाता से फंडिंग के साक्ष्य मिले थे। पुलिस की मानें तो अकाउंट डिटेल से खुलासा होने के बाद शातिरों ने फंडिंग का तरीका बदल लिया है। अब कई चरणों में अलग-अलग जगह से पहले देश में और फिर संबंधित व्यक्ति के अकाउंट में भेजा जाता है। 

सिंडिकेट देता मोटा लालच

धर्म के धंधेबाजों का सिंडिकेट धर्म बदलने पर 5 से 30 हजार रुपये हर महीने देता है। ब्रेन वॉश के लिए बच्चों की छठी भी मनवाते हैं। धर्मांतरण मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं हैं। पता चला है, कि धर्मांतरण करने वाले सिंडिकेट का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक ही नहीं, उत्तरप्रदेश के उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, सीतापुर, कन्नौज आदि जिलों में फैला है। धर्मांतरण कराने वाले धंधेबाज लोगों को प्रेरित करते हैं। धीरे-धीरे ये रकम बढ़ाते जाते हैं। पैसे के लालच और ब्रेनवॉश से लोग आसानी से अपना धर्म बदल रहे हैं।

दर्जन भर से अधिक स्थानों पर प्रार्थना सभाएं

धर्मांतरण से जुड़े लोग कानपुर कमिश्नरेट के विभिन्न इलाकों में काफी तेजी से सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं, कि दर्जन भर से अधिक स्थानों पर हर सप्ताह प्रार्थना सभाएं होती हैं। इस खेल में रोजाना कोई न कोई प्रलोभन में फंस जाता है। प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्मांतरण का खेल हो रहा है। इनके निशाने पर समाज का वंचित, शोषित तबका और कम पढ़े-लिखे लोग होते हैं। वे लोग लालच में आकर धर्म परिवर्तन कर लेते हैं। कुछ लोग गुपचुप तरीके से अपनी मुहिम को अंजाम देने में जुटे हैं, लेकिन पुलिस को सब कुछ हो जाने के बाद दूसरे से ही जानकारी मिलती है। 

जिंदगी बदलने का देते हैं लालच 

सूत्र बताते हैं कि धर्मांतरण से जुड़े लोग गरीब परिवारों से कहते हैं कि जिस व्यक्ति को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती, समाज में उपेक्षित होता है, वो हमसे जुड़ते हैं। उनके लिए कपड़े, रहने के लिए घर और दो वक्त के खाने का इंतजाम, बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम करते हैं। इससे उनकी जिंदगी बदल जाती है। लोगों को इस तरह से प्रेरित किया जाता है, कि वह सब कुछ भूलकर धर्म बदल लेता है। फिर वह दूसरे लोगों को भी प्रेरित करने लगता है।

गरीब और दलित होते टारगेट

अब तक के छह मामलों में पुलिस की जांच में सामने आया कि धर्मांतरण करने वाला गिरोह सिर्फ बस्तियों और मध्य वर्ग से नीचे तबके के लोगों को टारगेट करता है। उनकी बस्तियों में जाकर सभाएं करना, उन्हें अपने धर्मस्थल बुलाकर प्रेरित करना और अलग-अलग तरह से लालच देकर धर्म बदलवा देते हैं। इसके बाद उनके मोहल्ले में एक किराए का मकान लेकर या खरीदकर धर्मस्थल बना देते हैं। जहां से सारी गतिविधियां चलने लगती हैं।

धर्मांतरण के छह मामलों में एक तरह का लालच

कानपुर में अलग-अलग छह धर्मांतरण के मामलों में देखने में सामने आया कि सिंडीकेट सिर्फ गरीब बस्तियों को ही टारगेट कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोरों को सबसे पहले तो 30 से 50 हजार कैश, इसके बाद उनके घर में बीमार व्यक्ति का इलाज, फिर रहने की व्यवस्था और इसके बाद बच्चों को मिशनरी स्कूल में मुफ्त शिक्षा का झांसा दिया जाता है। उन्हें वीडियो और साहित्य के जरिए प्रेरित करके बताया जाता है कि धर्म बदलते ही किस तरह से रातों-रात पूरे परिवार की जीवनशैली बदल जाएगी। इस तरह से परिवार को झांसे में लेकर धर्म बदलवाते हैं। इसके बाद उन्हें भी अपने धर्म प्रचार में लगाकर दूसरों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते हैं। इनके लिए धर्मांतरण का काम कराने वालों को भी यह प्रत्येक महीने 10 से 30 हजार तक की सेलरी समेत अन्य सुविधाएं देते हैं।

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