SGPGI : दवाईयों से बचने के लिए लोग कर रहे फिजियोथेरेपी का रुख
लखनऊ, अमृत विचार। फिजियोथेरेपी आधुनिक चिकित्सा पद्धति की एक विधा है, लेकिन भारत में इस विधा का इस्तेमाल प्राचीन काल से होता आ रहा है। हालांकि समय के साथ और वैज्ञानिक शोधों के आधार पर इसमें बदलाव भी हुये हैं। मानसिक तनाव, पीठ, घुटनों के दर्द से लेकर कई अन्य बिमारियों में फिजियोथेरेपी काफी मददगार साबित हो रही है। मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है। यह कहना है एसजीपीजीआई के डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी का। उन्होंने यह बातें एसजीपीजीआई में फिजियोथेरेपी विषय पर आयोजित सीएमई में कहीं। सीएमई का आयोजन एसजीपीजीआई के कॉलेज ऑफ मेडिकल टेक्नालॉजी की तरफ से किया गया था।
इस अवसर पर डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी ने बताया कि मौजूद समय में बहुत से लोग दवाईयों से बचने के लिए फिजियोथेरेपी का रुख कर रहे हैं। इसके पीछे की वजह फिजियोथेरेपी का कम खर्चीला होना है। साथ ही इसका दुष्प्रभाव भी नहीं होता है, लेकिन इसके लिए जरूरत है कि प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट से फिजियोथेरेपी कराई जाये।
वहीं एसजीपीजीआई स्थित पीएमआर विभाग के डॉक्टर सिद्धार्थ राय ने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों के इलाज में फिजियोथेरेपी करने से परिणाम बेहतर आ रहे हैं। मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार देखा गया है।
इस अवसर पर डॉक्टर राहुल, संदीप शर्मा , राजेंद्र , नम्रता , मधुकर के द्वारा विभिन्न विषयों पर आख्यान प्रस्तुत किया गया। इसमें बड़ी संख्या में डॉक्टर मेडिकल छात्र सम्मलित हुए।
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