लखनऊ: गौवंश बीमार, व्यस्त हैं जिम्मेदार.... भुईयन देवी मंदिर के पास अधमरे हाल में गाय और नवजात बछड़ा 

Amrit Vichar Network
Edited By Ankit Yadav
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स्थानीय ने टोल फ्री नंबर 1962 पर दी सूचना, जवाब में आया कर्मचारी व्यस्त

अमृत विचार, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक तरफ गौवंश और अन्य आवारा पशुओं के सुरक्षा और स्वास्थ्य के दावे करती है तो वहीं राजधानी लखनऊ के टेढ़ीपुलिया के पास आदिल नगर इलाके में भुईयन देवी मंदिर के पास एक गाय दो दिन से बीमारी हालत में पड़ी हुई है। वहीं गाय के साथ उसका नवजात बछड़ा भी भूख की मारे अधमरे हाल में पड़ा हुआ है। लेकिन जब जिम्मेदारों को इसकी सूचना दी गई तो उन्होंने कर्मचारी व्यस्तता की बात कही। इसके अलावा लोगों ने नगर निगम भी इसकी सूचना दी, लेकिन अभी तक बीमार गाय को इलाज नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों के मुताबिक गाय का मुंह किसी कारणवश चिपक गया गया है, जिसकी वजह से वह कुछ खा पी नहीं पा रही है। ऐसे में न खाने की वजह से गाय की हालत दिन पर दिन गंभीर होती जा रही है तो वहीं नवजात बछड़े को भी अपनी मां का दूध भी नसीब नहीं हो रहा है।

आदिल नगर में भुईयन देवी मंदिर के पास करीब दो दिन से एक गाय बीमारी हालत से जूझ रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक गाय का मुंह किसी कारणवश चिपक गया गया है, जिसकी वजह से वह कुछ खा पी नहीं पा रही है। इसके अलावा गाय के पैरो में भी गंभीर चोट आई है। वहीं गाय के साथ उसका नवजात बछड़ा भी भूख के मारे बुरी हाल से जूझ रहा है। दरअसल, न खाने की वजह से गाय की हालत दिन पर दिन गंभीर होती जा रही है तो वहीं नवजात बछड़े को भी अपनी मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने जब टोल फ्री नंबर 1962 पर सूचना दी तो जवाब में कर्मचारी व्यस्त हैं कहकर मामले को टाल दिया गया।

सीएम योगी ने 520 मोबाइल वेटरनरी यूनिट किया था रवाना

 

गौरतलब है कि इसी साल 26 मार्च 2023 को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के अंतर्गत 201 करोड़ रूपए की लागत से 520 मोबाइल वेटरनरी यूनिट को हरी झंडी दिखाकर जिलों में गौवंशो और अन्य पशुओं के इलाज के लिए रवाना किया था। लेकिन कहीं न कहीं धरातल पर मोबाइल वेटरनरी यूनिट की कमी और लापरवाही देखने को मिल रही है। एक कॉल से एक्सीडेंट से घायल गौवंश को तत्काल इलाज का दावा यूपी सरकार का फेल होता नजर आ रहा है। कॉल करने के बाद इलाज नहीं कर्मचारी अपनी व्यस्तता बताकर रख देते हैं।

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