नया संकट : दालों से नहीं मिलेगी प्रोटीन... न सब्जियों से विटामिन और मिनरल्स

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Edited By Amrit Vichar
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खेतों में रासायनिक खाद के अत्यधिक प्रयोग का नतीजा, फसलों में जीवांश कार्बन के साथ जिंक, सल्फर, पोटाश की भारी कमी

बरेली, अमृत विचार। क्या कभी आपने सोचा है कि भरपूर दालें खाने के बाद भी अगर आपके शरीर में प्रोटीन की कमी बनी रहे तो क्या होगा, या फिर गेहूं की रोटी खाने के बावजूद शरीर अपुष्ट रह जाए और हरी सब्जियां भी आपके शरीर के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स की पूर्ति न कर पाएं तो आपके सामने क्या विकल्प रह जाएगा। फसलों में अंधाधुंध उर्वरकों का इस्तेमाल को अब तक मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटने की वजह माना जा रहा था लेकिन अब यह नई तरह का संकट सामने आ खड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस पर जल्द काबू न पाया गया तो इसके बड़े स्तर पर दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।

मृदा परीक्षण के ताजा आंकड़े बेहद गंभीर और चौंकाने वाले हैं। जिले के सभी 15 ब्लॉकों में लिए गए मिट्टी के 147 नमूनों में जीवांश कार्बन की मात्रा करीब 50 फीसदी या उससे भी कम मिली है। इसके अलावा नाइट्रोजन, फास्फोरस और जिंक भी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। मिट्टी की गुणवत्ता की यह गिरावट दोतरफा मार कर रही है। एक तो इसने मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बुरी तरह क्षीण कर दिया है, दूसरे अनाज और सब्जियों की पौष्टिकता भी लगभग खत्म होती जा रही है। हाल ही में क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में मिट्टी के इन नमूनों की जांच हुई है और उनकी गुणवत्ता की कमी के लिए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल को कारण बताया गया है।

जिला मृदा परीक्षण अधिकारी विश्वनाथ के मुताबिक मिट्टी के नमूनों में वैसे तो तमाम जरूरी तत्वों की कमी पाई गई लेकिन जीवांश कार्बन की घटती मात्रा सबसे गंभीर है। सामान्य तौर पर मिट्टी में .8 प्रतिशत जीवांश कार्बन होना चाहिए लेकिन अलग-अलग ब्लॉकों में यह 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक ही मिला है। इसी तरह जिंक, सल्फर,नाइट्रोजन और पोटाश की भी कमी पाई गई है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देकर इस बारे में जागरूक किया गया है।

दाल और सब्जियों में कम हो रहे हैं मुख्य पोषक और सूक्ष्म पोषक तत्व
कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरीश के मुताबिक शरीर के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है, इसके लिए लोग दाल खाते हैं, लेकिन मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से दालों में मुख्य पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो गए हैं। ऐसे में भरपूर दाल खाने से भी शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी न हो पाने की आशंका पैदा हो गई है। इसी तरह सब्जियों में पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। इसका मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रखने के लिए जैविक, कंपोस्ट और हरी खाद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। प्राकृतिक खेती और अवशेष प्रबंधन पर भी जोर देने की जरूरत है। फसल चक्र को छोड़ देना भी इसका एक कारण है। किसानों को बार-बार एक ही फसल की बुवाई करने से बचना चाहिए। धान-गेहूं के बाद दलहन और दूसरी फसलें भी उगानी चाहिए।

यही नुकसान आपके शरीर को भी

-सल्फर की कमी से अनाज के दानों और सब्जियों में चमक कम होती है।

-जिंक की कमी से फसलों में रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है।

-नाइट्रोजन कम हो तो पौधे का हरापन और वृद्धि घटती है।

-फास्फोरस की कमी से पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।

-मैग्नीशियम की कमी से अनाज और सब्जी की गुणवत्ता कम हो जाती है।

-आयरन की कमी से अनाज और सब्जी में पोषण की कमी होती है।

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