Chitrakoot: नगर पालिका ने कच्चे मकानों को किया ध्वस्त, लोग हुए बेघर, बोले- साहब डिग्गी पीटी और तोड़ दिहिन
चित्रकूट में नगर पालिका ने कच्चे मकानों को किया ध्वस्त।
चित्रकूट में नगर पालिका ने कच्चे मकानों को ध्वस्त किया। सालों से एक घर में रहने वाले लोग बेघर होने के बाद मायूस हो गए।
चित्रकूट, अमृत विचार। सालों से एक घर में रहने वाले लोग बेघर होने के बाद मायूस हैं। इनका कहना है कि वे वैधानिक या अवैधानिक मसले को नहीं जानते, वे तो इतना जानते हैं कि वे लोग सालों से यहां रह रहे हैं और उनके पूर्वजों ने उनको यहां बसाया था। अब उनसे उनका घर छिन गया, वे जाएं तो कहां जाएं।
गौरतलब है कि नगरपालिका ने बुधवार को जीजीआईसी रोड के किनारे स्थित कच्चे मकानों को ध्वस्त करा दिया। सालों से यहां रह रहे लोग एक ही दिन में बेघर हो गए। लगभग 18 घरों को जेसीबी से जमींदोज कर दिया गया। पालिका के अधिशासी अधिकारी लालजी, कोतवाली प्रभारी अजीत कुमार पांडेय के साथ पुलिस और पालिकाकर्मियों के भारी अमले ने इस कार्रवाई को पूरा किया।
ईओ ने बताया कि इन लोगों को कई बार कहने के साथ मुनादी पिटवाकर घर खाली करने को कहा गया था। ये सरकारी जमीन पर अवैधानिक रूप से कब्जा करके बनाए गए घर थे और यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनसम्मत है। जाहिर है कि प्रशासन के अपने तर्क होते हैं और कार्रवाई को कोई गलत नहीं ठहरा सकता पर बेघर होने वाले लोगों की अपनी व्यथा और मजबूरियों के साथ अपने तर्क भी हैं।
इनका कहना है कि चौमास निकल जाने देते तब गिरा देते। अब कभी बरसात तो कभी तेज धूप के मौसम में परिवारों को लेकर कहां जाएं। इन लोगों की बात से यह बात तो सामने आई कि इस कार्रवाई में मानवीय पहलू कहीं न कहीं दब गया। एक महिला ने बताया, डिग्गी पीटी और फिर घर गिराकर चले गए। बरसात के मौसम में कहां जाएं भइया।
हालांकि ईओ के अनुसार, कई लोगों को आवास योजना के तहत लाभ मिला है तो कई के लोढ़वारा स्थित कांशीराम कालोनी में घर हैं। पर अपनी अपनी वजहों से ये लोग यहीं बने रहे और आखिरकार बेघर हो गए।
बुलडोजर लेकर आए और गिरा दिहिन
लीला ने बताया कि उसके ससुर ने यहां घर बनवाया था। लगभग सात साल से वह यहां रह रही है। उसे न आवास मिला और न कुछ। जब घरवाला पैसा मिला तो कहा गया कि खुद की जमीन हो तो लो। हमरे पास जब खुद की जमीनै नहीं रही तो कहां से पैसा लेते। चार बच्चे हैं। कहीं किराये से रहेंगे। उसने बताया, साहब, बुलडोजर लेकर आए और गिरा दिहिन। उसने यह भी बताया कि उससे घर संबंधी किसी तरह का वादा नहीं किया गया।
यहीं पर शादी हुई हमार साहब
मंजू बताती है कि वह शादी के बाद यहीं आई थी। यहीं पर परिवार बढ़ा। व्यथा जताई, पेट खातिर कमऊबे कि किराया देन खातिर। उसने बताया कि उसके सास-ससुर भी यहीं रहते थे। लगभग चालीस साल उन लोगों को यहां रहते हो गए।
अब तो सड़क पर रहूंगा भइया
राममिलन बचपन से इसी जगह पर रहता रहा। दोनों पैरों से लाचार राममिलन के सामने अब कई समस्याएं हैं। उसने बताया कि न तो उसका कोई है और न उसका शरीर साथ देता है। अब उसके पास कुछ नहीं बचा। वह जैसे तैसे गुजारा करेगा और सड़क पर जिंदगी काटेगा।
लोढ़वारा में कालोनी फिर भी कई दिक्कतें
यह बात सही है कि इनमें से कई लोगों को लोढ़वारा स्थित कांशीराम कालोनी में आवास मिले हैं। पर लगभग आठ किमी दूर होने की वजह से मेहनत-मजदूरी कर पेट पालने वालों के सामने इसको लेकर भी कई तरह की समस्याएं हैं। इनका कहना है कि एक तो छोटे-छोटे बच्चों को वहां छोड़ना पड़ेगा और दूसरे रोजाना किराया लगाकर मजदूरी ढूंढने कर्वी आना पड़ेगा। अंजू ने बताया कि वहां आने जाने में 40 रुपये किराया लगता है। किराया रोज कैसे दे पाएंगे।
ईओ बोले, कानूनसम्मत कार्रवाई
ईओ ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई कानूनसम्मत और नियमों के तहत की गई है। जहां भी अवैध अतिक्रमण है, उसे गिराने के सख्त निर्देश हैं। इन लोगों को कई बार घर खाली करने को कहा गया। बाकायदा डिग्गी पीटी गई और फिर घर गिराए गए। उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोगों के पास लोढ़वारा कालोनी में आवास हैं। कुछ लोगों के नहीं हैं तो इनके रहने की व्यवस्था की जाएगी।
पूरी तरह गैरकानूनी कार्रवाई- रुद्र प्रसाद
उधर, इस कार्रवाई को किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता रुद्र प्रसाद मिश्र ने पूरी तरह से गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि यह जमींदारों की जमीन है, जिस पर ये लोग घर बनाए थे। क्या प्रशासन के पास इसका कोई सबूत है कि यह सरकार की जमीन है। अगर घर गिराना था तो पहले नोटिस देते, मुकदमा करते और फिर आगे की कार्रवाई करते। उन्होंने कहा कि वह गरीबों के लिए इस संबंध में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। बुलडोजर संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
