कुतुबखाना पुल : कार्यदायी संस्था ने खड़े किए हाथ... आवाजाही बंद कराओ तभी करेंगे काम

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Edited By Amrit Vichar
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कोहाड़ापीर रोड पर शुक्रवार शाम शटरिंग की चादर सिर पर गिरने से चली गई थी सुधीर की जान, शनिवार को निर्माण कार्य रहा बंद

बरेली, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव से पहले कुतुबखाना पुल का निर्माण पूरा करने के दबाव और लोगों की आवाजाही से हादसे हो रहे हैं। अब तक दो लोगों की जान चली गई है। शुक्रवार को राहगीर सुधीर की मौत से घबराई संस्था ने निर्माण कार्य कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। शनिवार को पूरी तरह से काम बंद रहा। संस्था का कहना है कि जब तक निर्माणाधीन पुल के आसपास लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं कराई जाती काम शुरू नहीं कराया जाएगा।

लोकसभा चुनाव की वजह से जनप्रतिनिधियों के दबाव पर अफसर बार-बार निर्माण की प्रगति देखने के साथ ही समीक्षा करते हैं। दबाव बनाने के लिए कार्यदायी संस्था मंटेना इंफ्रासोल पर पिछले कुछ ही दिनों में दो बार 38-38 लाख का जुर्माना डाला जा चुका है। इसके बाद निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ी लेकिन कोहाड़ापीर मार्ग पर तंग सड़क होने पर लापरवाही जारी रही। इसके चलते शुक्रवार शाम लोहे की चादर सिर पर गिरने से मोहल्ला भूड़ में रहने वाले 55 वर्षीय सुधीर कुमार की जान चली गई।

सुधीर के भाई अनिल कुमार ने इस मामले में प्रेमनगर थाने में कार्यदायी संस्था के प्रबंध निदेशक अमित चोपड़ा, प्रोजेक्ट मैनेजर एमके सिंह समेत तीन लोगों को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। इधर, शनिवार को कोई मजदूर काम पर नहीं पहुंचा। दुकानदारों ने बताया कि शटरिंग की भारी भरकम चादर गिरने के बाद घायल सुधीर को तड़पता देख मजदूर घबरा गए थे। एक-एक कर लगभग सभी मजदूर और इंजीनियर मौके से खिसक लिए। उनको डर सता रहा था कि कहीं आसपास के लोग इकट्ठा होकर हमला न कर दें। घटना के बाद इसे छिपाने को पुल निर्माण में लगे मजदूर ने मौके से शटरिंग की चादर हटाकर घटनास्थल की सफाई कर दी थी।

खतरा सिर पर... लोग मानने को तैयार नहीं
सेतु निगम के अफसरों का कहना है कि कुतुबखाना पुल निर्माण में सुरक्षा मानकों और पहले हुए हादसों को लेकर बैरिकेडिंग कराने के साथ ही गर्डर से रास्तों को बंद किया था। कई बार यातायात पुलिस को भी पत्र लिखा गया लेकिन इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। जिला अस्पताल और कोतवाली रोड पर जहां निर्माण चल रहा है कि उसके पास बैरियर लगा दिए थे। एक कर्मचारी की तैनाती की गई ताकि राहगीर हादसे का शिकार न हों लेकिन शाॅर्टकट अपनाने के लिए लोग खतरे को दरकिनार कर रहे हैं।

पहले हुए हादसों से भी नहीं लिया सबक
सेतु निगम, कार्यदायी संस्था और स्मार्ट सिटी के अभियंताओं की अनदेखी दुकानदारों, राहगीरों और आसपास के लोगों पर भारी पड़ रही है। कोहाड़ापीर के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि पुल निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कई हादसे हो चुके हैं। 18 जुलाई को घंटाघर के पास शटरिंग खोलते समय चादर गिरने पर लोग बाल-बाल बचे थे। इससे पहले 8 अप्रैल को कुमार टॉकीज और इंदिरा मार्केट के बीच लोहे की चादर गिरने से एक महिला घायल हुई थी। तीन सितंबर को मजदूर धनंजय की मौत होने के बाद चौथा हादसा सुधीर के साथ हुआ। जिसमें उनकी मौत हो गई। अधिकारी सिर्फ यह देखने आते हैं कि पुल कितना बना है। सुरक्षा इंतजामों से उन्हें भी कोई मतलब नहीं है।

हकीकत से वाकिफ होकर भी कर दिया था अनसुना
निर्माणाधीन पुल पर कोहाड़ापीर की तरफ काम तेजी से चल रहा है। कोहाड़ापीर से कुतुबखाना के बीच दिनभर हजारों लोगों की आवाजाही होती है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि जिन जगहों पर काम चलता है वहां सुरक्षा गार्ड लगा रखे हैं। वे लोगों को रोकते हैं लेकिन लोग उनकी बात अनसुना करके कोई न कोई बहाना बनाकर आगे बढ़ जाते हैं। पूर्व में निरीक्षण करने आए स्मार्ट सिटी के अफसरों और जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में बताया गया था।

ठेकेदार लापरवाह है। बड़े ही जोखिम भरे ढंग से निर्माण कार्य चल रहा है। मौके पर न इंजीनियर रहते हैं न कोई अफसर। पहले भी कई बार हादसे हुए हैं। इसके बाद भी सुरक्षा मानकों को नजरंदाज करने से फिर घटना हो गई। - शिवम सक्सेना, कोहाड़ापीर रोड

एक मजदूर की मौत के बाद हेलमेट तो दे दिए गए लेकिन सेफ्टी बेल्ट अब भी नहीं दिखती। ऊपर काम होता है और नीचे कोहाड़पीर रोड पर लोग गुजरते हैं। अब भी कोई गारंटी नहीं आगे कोई और अनहोनी नहीं होगी। - डॉ. आलोक सक्सेना, कोहाड़ापीर रोड

कोहाड़ापीर की तरफ काम ने एक सप्ताह से तेजी पकड़ी है। मजदूर की मौत से सबक इतना लिया कि काम करने से पहले सभी मजदूर हेलमेट पहनते हैं लेकिन निर्माणाधीन जगह के आसपास कोई सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होता। - तेजिंदर सिंह, दुकानदार

निरीक्षण के नाम पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि खानापूरी करते हैं। कोहाड़ापीर चौकी के पास सड़क के दोनों ओर बेतरतीब पड़ी सरिया और एंगल से खतरा है। दो लोगों की मौत हो चुकी है, आगे भी सुरक्षित ढंग से काम हो पाएगा, ऐसा नहीं लग रहा। - राहुल सक्सेना, दुकानदार

नियमित रूप से निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। जहां खतरा महसूस होता है, वहां सुरक्षाकर्मियों को लगाकर आवागमन रोकते हैं। इसके लिए बाकायदा जगह-जगह गार्ड तैनात किए हैं लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं। कई लोग प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए बढ़ जाते हैं। डीएम, कमिश्नर और नगर आयुक्त को जल्द इसकी पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी। - अरुण कुमार, डीपीएम सेतु निगम

व्यापारियों ने मुर्दाबाद लिखे हुए पोस्टर जलाएं
कुतुबखाना पुल निर्माण के दौरान 3 सितंबर को पीलीभीत के तहसील पूरनपुर के चंदिया हजारा निवासी मजदूर धनंजय की मौत होने के बाद शुक्रवार शाम प्रेमनगर के भूड निवासी ठेकेदार की मौत से व्यापारियों में गुस्सा है। समाज सेवा मंच के अध्यक्ष हाजी नदीम शम्सी के नेतृत्व में व्यापारियों ने इस घटनाक्रम को लेकर नगर आयुक्त मुर्दाबाद और सेतु निगम मुर्दाबाद लिखे पोस्टर जलाए। इसके साथ ही व्यापारियों की लिखित में सुरक्षा की मांग की। नदीम शम्सी ने कहा कि ठेकेदार ही नहीं उक्त दोनों अधिकारी भी मजदूर और ठेकेदार की मौत के कम जिम्मेदार नहीं है। इनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की शासन स्तर से की चाहिए। अखिलेश, सूरज, रजत गुप्ता, मोहित, तेज सिंह, सुरजीत, बृजेंद्र प्रताप आदि शामिल रहे।

कुतुबखाना पुल में पूर्व में हुए हादसे में मृत मजदूर के मौत की जांच एडीएम सिटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी कर रही थी। इसमें अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी और सीओ सिटी शामिल हैं। पहले वाले प्रकरण की जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी गई है। इसमें एजेंसी की लापरवाही मिली है उसने सुरक्षा इंतजाम पूरे नहीं किये थे। इसी कमेटी को ही इस प्रकरण की भी जांच दे दी है-निधि गुप्ता वत्स, सीईओ स्मार्ट सिटी।

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