बरेली: हिंदी दिवस पर आयोजित हुए कार्यक्रम
बरेली,अमृत विचार। सोमवार को विश्व हिंदी दिवस पर शहर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। अधिकारियों ने हिंदी के कामकाज पर जोर दिया। हालांकि कोरोना के चलते स्कूल बंद रहे तो स्कूलों में वाद-विवाद व सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन नही हो पाया। लेकिन लोगों ने घरों में व ऑनलाइन प्रतियोगित आयोजित की। जिसमें लोगों ने …
बरेली,अमृत विचार। सोमवार को विश्व हिंदी दिवस पर शहर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। अधिकारियों ने हिंदी के कामकाज पर जोर दिया। हालांकि कोरोना के चलते स्कूल बंद रहे तो स्कूलों में वाद-विवाद व सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन नही हो पाया। लेकिन लोगों ने घरों में व ऑनलाइन प्रतियोगित आयोजित की। जिसमें लोगों ने बढ़ चढ़कर हिंदी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया।
काव्य गोष्ठी एवं हिंदी सेवी सम्मान समारोह का आयोजन
हिंदी दिवस के अवसर पर सुपंथी जन कल्याण समिति की ओर से काव्य गोष्ठी एवं हिंदी सेवी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य जग के वरिष्ठ साहित्यकार एवं बरेली कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो.एनएल शर्मा को संस्था द्वारा सुपंथी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्था के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय गीतकार गीतकार डा. दीपंकर गुप्त, सुप्रसिद्ध कवि एवं शिक्षाविद इंद्रदेव त्रिवेदी, हास्य व्यंग्य के चर्चित कवि आनंद गौतम ने उन्हें बैज, शाल, प्रतीक चिन्ह, माला पहनाकर प्रशास्ति पत्र प्रदान किया।
कार्यक्रम का आरंभ इंद्रदेव त्रिवेदी ने सरस्वती वंदना से किया और उन्होंने हिंदी विषय पर केंद्रीय अपनी कविता प्रस्तुत की। कविवर आनंद गौतम ने हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा के साथ राज भाषा का सम्मान देते हुए कहा कि उलझे हुए प्रश्नों का समाधान करें हम। हम हैं हिंदुस्तानी, हिंदी का सम्मान करें हम।

प्रो.एनएल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम सभी हिंदी में वार्तालाप करें और नये-नये शब्दों से लोगों का परिचय करायें अपने व्यवहार में अंग्रेजी शब्दों का तिरस्कार करते हुए हिंदी के विकास के लिए हर संभव प्रयास करें। डा. दीपंकर गुप्त ने कहा कि पिता की शिक्षा और संस्कार से वंचित होने का अभाव मुझे निरंतर सताता रहा। इसके बाद पिता की स्मृति को संजोते हुए मेरा प्रथम काव्य संग्रह 14 सितंबर 1990 को आंसुओं के चित्र का लोकापर्ण हुआ।
पुस्तक का विमोचन व हिंदी सेवियों सम्मान समारोह
मानव सेवा क्लब द्वारा हिंदी दिवस पर सोमवार को रामपुर गार्डन में पुस्तक का विमोचन व हिंदी सेवियों सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आरंभ मधु वर्मा ने मां शारदे की वंदना से किया। कवि इंद्र देव त्रिवेदी ने हिंदी गीत बड़े ही मोहक ढंग से प्रस्तुत किया। अनिल चौधरी द्वारा रचित विमोचित पुस्तक में 23 बाल प्रेरक कथाएं हैं जिसमें भक्त प्रहलाद, भक्त ध्रुव, बाल हनुमान एकलव्य, वीर अभिमन्यु, बालक भगत सिंह प्रमुख हैं।
इस दौरान हिंदी में विशेष उपलब्धियों प्राप्त करने वाली सरला चौधरी, मीरा मोहन, निर्भय सक्सेना, मधु वर्मा, अनिल चौधरी को उत्तरीय, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र देकर क्लब के अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा, इन्द्र देव त्रिवेदी, सुधीर मोहन, डा. अतुल वर्मा, अभय भटनागर, सुधीर मोहन ने सम्मानित किया। इस अवसर पर अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने कहा कि देखना वह दिन दूर नहीं जब हिंदी विश्व की भाषा बनेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य भूषण डा. सुरेश बाबू मिश्रा ने की। वाराणसी की संस्था द्वारा शब्दश्री सम्मान मिलने पर डा. सुरेश बाबू मिश्रा का अभिनंदन किया गया। सभी का आभार महासचिव अभय सिंह भटनागर ने जताया।

हिंदी दिवस पर हुई हिंदी प्रश्नावली प्रतियोगिता
एसबीआई वरिष्ठ नागरिक समूह द्वारा हिंदी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गए। जिनमें प्रमुखता से श्रुति लेख प्रतियोगिता व हिंदी प्रश्नावली प्रतियोगिता थी। कार्यक्रम एसके कपूर द्वारा आयोजित किये गए। जिसमें समूह के सभी 250 सदस्यों व उनकी पत्नियों ने भी सहभागिता की।
श्रुति लेख प्रतियोगिता आयोजित करने का उद्देश्य लोगों हिंदी को सुलेख रूप में लिखने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। हिंदी प्रश्नांवली के माध्यम 70 मिनट में 70 प्रश्नों का उत्तर देना था। इस दौरान समूह के 9 सदस्यों व 5 सदस्यों की पत्नियों को हिंदी साहित्य सेवा व कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। वहीं, प्रतियोगिता में विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसके कपूर,एनएस अग्रवाल,एके सिन्हा व आदि रहे।
फोटो नंबर 405 प्राचार्य डा. सौरभ अग्रवाल
नई आशा और विश्वास के साथ मनाया हिंदी दिवस
महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय के प्राचार्य डा. सौरभी अग्रवाल ने हिंदी दिवस मनाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस नई आशा और विश्वास के साथ मनाई गई है। क्योंकि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हिंदी के संवर्धन के संबंध में जो भी प्रावधान किए गए हैं। वे वास्तव में सराहनीय है। इससे हिंदी के विकास की दिशा में नई आशा दिखाई देती है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा मातृभाषा में देने की जो बात नई शिक्षा नीति में की गई है। उससे निश्चित ही हिंदी भाषा का संवर्धन होगा उत्तर प्रदेश में 22 करोड़ जनसंख्या हिंदी भाषी हैं ऐसे में यदि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाएगी तो निश्चित ही हिंदी भाषा अपने सम्मान की ओर आगे बढ़ेगी।
