बरेली: अनदेखी की छतरी के नीचे अफसर, आशाएं धूप और बारिश में नंगे सिर
बरेली, अमृत विचार। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के सिर पर तनी अनदेखी की छतरी ने इस कदर उन्हें सुरक्षित कर रखा है कि मोटे सरकारी खर्च पर चलने वाली विभागीय योजनाएं एक के बाद एक मटियामेट हो रही हैं।
करीब साढ़े छह लाख रुपये कीमत के वे छाते दो साल से स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में डंप होने का मामला सामने आया है जो आशा वर्करों को दिए जाने थे। अब तक इन्हें नहीं बांटा गया है। इनमें कितने गायब हो चुके हैं, यह भी किसी को नहीं पता है। आशा वर्करों और संगनियों को सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए हर मौसम में घर-घर जाना पड़ता है।
इसी नजरिए से शासन ने सभी जिलों की आशा वर्करों और संगनियों के लिए छाते खरीदने का आदेश दिया था। वित्तीय वर्ष 2020-21 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छातों के लिए बजट जारी किया गया।
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एक छाते की अधिकतम कीमत दो सौ रुपये तय की गई थी। जिले में इसके बाद 33 सौ छाते खरीदे गए, इनका वितरण 2021 में ही किया जाना था लेकिन उन्हें स्टोर में डंप कर दिया गया। साढ़े छह लाख कीमत के दो साल से स्टोर में ही धूल फांक रहे हैं।
अब तक किसी अधिकारी ने न इन्हें बंटवाने की कोशिश की है न यह देखने की स्टोर में छाते सुरक्षित भी हैं या उनकी बंदरबांट हो गई है। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में इस तरह की हेराफेरी के मामलों की कोई गिनती ही नहीं है। इससे पहले फाइलेरिया की दवाएं नाले में बहा दी गई थीं। सीएमओ के कार्यालय में ही एक्सपायर दवाओं का जखीरा मिला था लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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