मुरादाबाद : प्रदेश में फार्मासिस्ट के 450 पद खाली, मरीजों के इलाज पर संकट

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Edited By Amrit Vichar
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मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी प्रोन्नति में स्वास्थ्य अधिकारियों की मनमानी, चीफ फार्मासिस्ट के भी 250 पद खाली, चरित्र पंजिका न होने का अधिकारी बना रहे बहाना

विनोद श्रीवास्तव,अमृत विचार। बेहतर चिकित्सा सेवा की राह में फार्मासिस्टों की भारी कमी अड़चन बनी है। प्रदेश में फार्मासिस्ट के 7500 पदों में से 450 खाली हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री के आदेश पर भी प्रोन्नति में अधिकारियों की मनमानी से डिप्लोमा फार्मासिस्ट और उनके एसोसिएशन के पदाधिकारी नाखुश हैं। वह मुख्यमंत्री से मिलकर रिक्त पदों पर भर्ती की आवाज उठा चुके हैं।

एक तरफ प्रदेश में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था बनाने को आयुष्मान भव: अभियान चल रहा है। मगर चिकित्सा व्यवस्था की अहम कड़ी फार्मासिस्ट के 7500 पदों में से 450 खाली होने से इस पर ग्रहण लग रहा है। इनकी कमी से जिला मुख्यालय के अस्पताल के अलावा सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी चिकित्सा सेवा लड़खड़ा रही है। इससे मरीज निजी अस्पताल में जाकर महंगा इलाज कराने को विवश हैं।

8 की जगह 23-24 साल में हो रही प्रोन्नति
फार्मासिस्ट से चीफ फार्मासिस्ट के पद पर प्रोन्नति के लिए नियमावली के अनुसार 8 साल की सेवा पूरी होनी चाहिए। लेकिन, लालफीताशाही के फेर में 23-24 साल में प्रोन्नति मिल रही है। प्रोन्नति में टालमटोल के चलते प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चीफ फार्मासिस्ट के 250 पद खाली हैं। चरित्र पंजिका लिखने के नाम पर प्रोन्नति में मनमानी से एसोसिएशन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिलकर नाराजगी जता चुके हैं। कई फार्मासिस्ट बिना प्रोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

नुस्खा लिखने का मिले अधिकार, झोलाछाप के शोषण से मिलेगी मुक्ति
फार्मासिस्ट एसोसिएशन लंबे समय से चुनिंदा दवाओं के नुस्खा लिखने का अधिकार सरकार से मांग रहा है। उनका तर्क है कि सरकार से फार्मासिस्ट को डॉक्टर लिखने की अनुमति मिल चुकी है। तो फिर दवा का नुस्खा लिखने का अधिकार देने में क्या हर्ज है। जबकि डाक्टर की पर्ची देखकर हम दवा वितरित करते हैं। मेडिकल स्टोर्स पर फार्मासिस्ट ही दवा देता है। फार्मासिस्ट कहते हैं कि यदि उन्हें अधिकार मिलने से मरीजों को झोलाछाप के शोषण से मुक्ति मिल जाएगी।

सीएचसी, पीएचसी व इमरजेंसी सेवा में कमी पड़ रही भारी
फार्मासिस्ट के पदों पर भर्ती न होने से आकस्मिक सेवा के अलावा सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज प्रभावित हो रहा है। रात्रिकालीन ड्यूटी के समय चिकित्सक के न होने पर ग्रामीण क्षेत्र में मरीज अस्पताल से निराश बिना इलाज के लौट जाते हैं।

मुरादाबाद मंडल की यह है स्थिति

  • मुरादाबाद: मंडल मुख्यालय पर फार्मासिस्ट के 72 में से 22 पद खाली हैं। जबकि चीफ फार्मासिस्ट के 23 में से 9 पदों पर प्रोन्नति से तैनाती का इंतजार है।
  • सम्भल: सम्भल जिले में फार्मासिस्ट के कुल 43 पद में से 8 खाली हैं। जबकि चीफ फार्मासिस्ट के 9 में से 5 पद रिक्त हैं।
  • बिजनौर: यहां फार्मासिस्ट के कुल 122 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 7 रिक्त हैं। जबकि चीफ फार्मासिस्ट के 23 में 7 खाली हैं।
  • अमरोहा: फार्मासिस्ट के 62 पद में से 20 रिक्त हैं। चीफ फार्मासिस्ट के 12 में से 8 पदों पर तैनाती नहीं है।
  • रामपुर: इस जिले में 48 में से फार्मासिस्ट के 10 पद रिक्त हैं। जबकि चीफ फार्मासिस्ट के 15 पदों पर नियुक्ति पूरी है।


प्रदेश में फार्मासिस्ट का 7500 का कैडर है। इसमें 450 पद खाली हैं। चरित्र पंजिका उपलब्ध न होने का बहाना कर अधिकारी 8 साल में मिलने वाली प्रोन्नति 23-24 साल की सेवा पूरी होने पर दे रहे हैं। पदों की रिक्ति से इलाज पर असर पड़ रहा है। झोलाछाप इसका फायदा उठाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रोन्नति प्रक्रिया में बदलाव होना चाहिए। चुनिंदा दवा का नुस्खा लिखने का कानून हरियाणा, उत्तरांखड में लागू है। प्रदेश में इसकी मांग लंबे समय से कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे। मगर सरकार की हां का इंतजार है।-संदीप बडोला, प्रदेश अध्यक्ष

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