बरेली: छुट्टा पशुओं की वजह से खड़ी हो जाती हैं ट्रेनें, पर दावा है वंदे भारत चलाने का
बरेली, अमृत विचार। देहरादून से लखनऊ के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजने के साथ जल्द इसकी शुरुआत के दावे भी लगातार किए जा रहे हैं लेकिन रेलवे अफसर भी जानते हैं कि अभी इस सपने का सच होना मुश्किल है।
दरअसल इस रूट पर वंदे भारत चलाने में दो बड़ी अड़चन हैं। एक तो ट्रैक पर अक्सर विचरने वाले आवारा पशु और उससे भी ज्यादा खुद रेलवे की सुस्ती। दरअसल, ट्रैक को अभी इस लायक ही नहीं बनाया जा सका है कि उस पर सौ किमी से ज्यादा रफ्तार से कोई ट्रेन दौड़ाई जा सके।
मुरादाबाद से लखनऊ के बीच अब भी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार सौ किमी घंटा है। दावा किया गया था कि मार्च तक ट्रैक को 130 किमी घंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाने के लायक बना दिया जाएगा लेकिन अब तक कागजी खानापूरी के अलावा कोई खास काम नहीं हो पाया है।
करीब चार सौ किलोमीटर के इस ट्रैक पर अब भी ट्रेनें पुरानी रफ्तार पर दौड़ रही हैं। दिसंबर में उत्तर रेलवे के तत्कालीन जीएम ने बरेली जंक्शन निरीक्षण के दौरान दावा किया था कि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए जल्द काम शुरू हो जाएगा लेकिन बरेली से मुरादाबाद और मुरादाबाद से बरेली के बीच स्पीड ट्रायल के बाद ज्यादा कुछ नहीं हो पाया।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक ट्रैक पर अभी कई जगह काम होने बाकी है। इसी वजह से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने का काम रुका हुआ है। वंदे भारत की राह में दूसरी सबसे बड़ी बाधा मुरादाबाद से बरेली के बीच आवारा पशु हैं जो अक्सर ट्रैक पर आकर ट्रेनों को रोक देते हैं।
बरेली से आगे निकलते ही फतेहगंज पूर्वी, पीतांबरपुर, बरेली कैंट, सीबीगंज जैसे इलाकों में आए दिन सीआरओ ( कैटल रन ओवर) होते रहते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए रेल प्रशासन लगातार पशुओं को रेलवे ट्रैक से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव जरूर है लेकिन अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड को लेना है। ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने का काम ऑपरेटिंग का है, इस पर काम चल रहा है। - सुधीर सिंह, सीनियर डीसीएम मुरादाबाद रेल मंडल
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