आयुर्वेद ही शरीर के आरोग्यता की गारंटी: प्रो. एके सिंह
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने कहा कि आयुर्वेद शरीर रूपी मशीन को संचालित करने के लिए एसओपी बताता है और साथ ही शरीर के आरोग्यता की गारंटी भी देता है। प्रो. सिंह ने गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में शुक्रवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 54 वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 9वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी के क्रम में तीसरे दिन आयुर्वेद “संपूर्ण आरोग्यता की गारंटी” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत देश में हजारों वर्ष पूर्व से यह चिकित्सा पद्धति सफलतापूर्वक चलाई जा रही है।
बीच में हम इससे दूर हो गए थे मगर वर्तमान सरकार के प्रयास से धीरे-धीरे उस प्राचीन पद्धति की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में वैद्य का स्थान गुरुतुल्य बताया गया है। शास्त्रों में देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमार का वर्णन मिलता है। आयुर्वेद स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का रक्षण करने के साथ ही रोगी के उपचार की विधि बताता है। हमारे जीवन में आहार की विधि और पथ्य-अपथ्य का सम्यक विचार किया गया है। एक अध्ययन में पूरे विश्व में भारतीय थाली को सर्वश्रेष्ठ और पौष्टिकता युक्त थाली बताया गया है।
सवाई आगरा से आये ब्रह्मचारी दासलाल ने कहा कि आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है और आचार्य चरक विश्व के प्रथम फिजिशियन थे। कटक उड़ीसा से पधारे महंत शिवनाथ ने कहा कि आयुर्वेद से योग को अलग नहीं किया जा सकता। आसन, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या स्वस्थ रहने के सबसे उपयोगी साधन है। आयुर्वेद दवाओं से अधिक परहेज पर ध्यान देता है। आयुर्वेद और योग जीवन को सदैव नवीनता प्रदान करते हैं।
आयुर्वेद से शरीर स्वस्थ होता है तो योग से मन स्वस्थ और शांत होता है। इन दोनों का परस्पर घनिष्ठ संबंध है। विशिष्ट वक्ता गुरु गोरक्षनाथ आयुर्विज्ञान संस्थान सोनबरसा के प्रधानाचार्य डॉ मंजूनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य का स्वस्थ रक्षण करना ही आयुर्वेद है। आयुर्वेद हमारे आरोग्यता को पूर्ण बनाए रखता है। हमारी दिनचर्या संयमित रहती है तो मन भी प्रसन्न रहता है। मन जब चिंता मुक्त रहता है तो वह हमें जीवन में अनेक रोगों से बचाता है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् के अध्यक्ष व पूर्व कुलपति प्रो उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आयुर्वेद विश्व की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति है। यह पूर्णतया प्राकृतिक और आध्यात्मिक है। इस पद्धति में हमारे पर्यावरण में विद्यमान वनस्पतियों, औषधियों व तत्वों के माध्यम से ही रोगों का उपचार बताया गया है। प्रकृति में विद्यमान हर वनस्पतियां ईश्वर के द्वारा हम लोगों को दिया गया वरदान है ।
उन्होंने कहा कि कोई ऐसी वनस्पति नहीं है जो औषधि के रूप में न हो। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ,वाराणसी से आये महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा तथा कालीबाडी के महन्त रविन्द्र दास आदि मौजूद रहे।
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