Kanpur News: पीयू पेंट से जहर का खतरा हटाया, HBTU के पेंट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों ने किया शोध

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कानपुर के एचबीटीयू के पेंट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों ने किया शोध।

कानपुर के एचबीटीयू के पेंट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों ने शोध किया। पीयू पेंट से जहर का खतरा हटाया। इसके साथ ही चमक व गाढ़ापन लाने वाले आईसोसाइनेट को भी हटाया है।

कानपुर, अमृत विचार। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने शोध कर पॉलीयूरीथेन (पीयू) पेंट से शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक आईसोसाइनेट को दूर करने का दावा किया है। आईसोसाइनेट जहरीला पदार्थ है जो चमक व गाढ़ापन लाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह त्वचा के लिए संवेदनशील, फेफड़ों और सांस में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

इसके गले में जाने से सांस की नली, दिल व खून के बहाव की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों ने तकनीक को प्रमाणित कराने के लिए देश के साथ ही कई विदेशी संस्थानों को इसका फार्मूला भेजा है। पेटेंट की प्रक्रिया भी कराई जा रही है। 

पेंट विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण मैथानी और असिस्टेंट प्रो. दुर्गेश कुमार सोनी ने पीयू पेंट पर शोध किया है। असिस्टेंट प्रो. दुर्गेश कुमार सोनी के मुताबिक यह पेंट लोहे, लकड़ी पर फाइनल कोट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इसे आमतौर पर प्राइमर और इंटरमीडिएट कोट पर लगाया जाता है। यह लंबे समय तक बना रहता है। इसमें आईसोसाइनेट होता है, जिसका पानी के साथ काफी ज्यादा तेजी से रिएक्शन होता है। यह पानी के साथ मिलकर शरीर और अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है। इस समस्या को देखते हुए रासायनिक प्रक्रिया कराई गई। 

सबसे पहले एपॉक्सी रजिन (गोंद की तरह का मिश्रण है) को कार्बन डाईऑक्साइड के साथ रिएक्शन कराया जाता है। फिर उसके बाद एमिन से क्यूरिंग होती है। इस तरह से तैयार पीयू पेंट और आईसोसाइनेट आधारित पेंट की क्वालिटी एकदम समान मिली। 

जल और मृदा नहीं हो सकेगी प्रदूषित 

प्रो. अरुण मैथानी के मुताबिक आईसोसाइनेट के न पड़ने से पीयू पेंट से जल और मृदा संबंधित प्रदूषण नहीं हो पाएगा। पेंटर कार्य करने के बाद हाथ नल के पास या जमीन पर धोते हैं। यह बहकर नालियों और फिर नाले में चला जाता है, जबकि जमीन से अंदर की ओर पहुंच सकता है।

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