मुरादाबाद शैली की रामलीला को पंकज ने दी अलग पहचान, 15 अक्टूबर को काठमांडू में देंगे प्रस्तुति

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50 साल से रंगमंच से जुड़े हैं निर्देशक पंकज, 15 अक्टूबर को काठमांडू में देंगे रामलीला की प्रस्तुति

सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न के साथ डॉ.  पंकज दर्पण अग्रवाल।

विनोद श्रीवास्तव,अमृत विचार। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम में बचपन से ही आस्थावान महानगर के डॉ.पंकज दर्पण अग्रवाल ने रामलीला के मंचों पर अपने पात्र के जीवंत मंचन और रामलीला का सफल निर्देशन कर प्रदेश व देश में पहचान स्थापित की है। उन्होंने मणिपुर, अंडमान निकोबार द्वीप को छोड़कर देश के हर प्रदेश में रामलीला का मंचन और निर्देशन कर मुरादाबाद की ख्याति बढ़ाई है। 15 अक्टूबर को वह काठमांडू में रामलीला की प्रस्तुति देंगे।

बात रामलीला के मंचन की हो और महानगर के परसादी लाल चौक ताड़ीखाना मोहल्ले के रहने वाले डॉ.पंकज दर्पण अग्रवाल का जिक्र न आए यह संभव ही नहीं। उनके राेम-रोम में प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था है। वह बचपन से ही रामलीला के प्रति आकर्षित हुए तो फिर इसमें ही रम गए। उन्होंने रामलीला में न सिर्फ विभिन्न पात्रों का जीवंत अभिनय कर लोगों की सराहना पाई है, बल्कि कई बड़ी रामलीला में निर्देशन कर अपने साथ मुरादाबाद की ख्याति को भी ऊंचाई दी है।  

दिल्ली का मंच हो या मुंबई का रामलीला मैदान हर जगह उनकी उपस्थिति से मंचन निखर जाता है। वह न सिर्फ राम, भरत की भूमिका निभाकर लोगों के बीच अपनी श्रेष्ठता साबित कर चुके हैं। वह कहते हैं कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के समय से ही कंपनी बाग की रामलीला देखकर आकर्षित हुए। रामानंद सागर कृत रामायण में मुरादाबाद की रामलीला शैली की छाप है। उनका कहना है कि दिल्ली की रामलीला में भरत की भूमिका पांचवें दिन राम के वनवास देने के चलते कैकेयी को भरत के द्वारा उलाहना देने का मंचन यादगार है।

लाइनपार और लाजपतनगर की रामलीला का है नाम
पंकज बताते हैं कि अपने शहर में लाइनपार, दसवां घाट और लाजपतनगर में होनी वाली रामलीला प्रमुख है। लाइनपार और दसवां घाट की रामलीला में स्थानीय और लाजपत नगर में वृंदावन से बुलाए गए कलाकार विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हैं।

विदेशों में भारतीय धर्म परंपरा की जड़ें कर रहे गहरी
पंकज न सिर्फ भारत बल्कि इसके बाहर भी रामलीला के माध्यम से भारतीय धर्म परंपरा की जड़ों को गहराई देने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह अमेरिका, इंग्लैंड और इंडोनेशिया में रामलीला की आनलाइन तैयारी कराते हैं। वहां बसे भारतीय मूल के लोग रामलीला के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों से अपनी परंपरा को जोड़ रहे हैं। उनका समाज के लिए संदेश है कि भगवान श्रीराम में आस्था और विश्वास रखें। मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण से सीख लेकर परिवार और समाज को सकारात्मक दिशा दें।

कई मंच पर पाया पुरस्कार, मुख्यमंत्री से भी मिला सम्मान
पंकज दर्पण की प्रतिभा की तारीफ स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार कर चुके हैं। पिछले साल गोरखपुर में रामलीला के मंचन से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया था। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी पत्थर वाले मंदिर के महंत मनीष दास के हाथों अपनी श्रेष्ठता के चलते सम्मान मिल चुका है। अयोध्या में उन्हें मानव रत्न सम्मान भी इस साल मार्च में उन्हें मिला है। 26 अक्टूबर को अयोध्या में फिर उनका नागरिक अभिनंदन होगा। 

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