बरेली: महिला यात्रियों की सुरक्षा-सहूलियत से सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर समझौता
शहर में दोनों बस अड्डों पर महिलाओं की सुरक्षा के नहीं इंतजाम
शब्या सिंह तोमर, बरेली, अमृत विचार। सेटेलाइट और पुराना बस अड्डे पर महिलाओं की मदद और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। दोनों अड्डों पर महिला अधिकारी और कर्मचारी भी हैं, लेकिन महिला यात्रियों के बारे में वह भी कुछ नहीं सोचते हैं। महिला हेल्प डेस्क भी सिर्फ नाम की है। कई महिला यात्रियों को बस अड्डे में शौचालय तक का नहीं पता चल पाता है।
बस अड्डों पर महिला यात्री दूसरे शहरों से भी आती हैं। रविवार की दोपहर दोनों ही बस स्टेशनों पर महिला पुलिस तो छोड़िए कोई पुरुष पुलिसकर्मी भी नहीं मौजूद दिखा। पुराने बस स्टेशन पर फीडिंग रूम में ताला लगा हुआ था, पूछने पर कर्मचारी ने बहाना दिया कि रविवार की वजह से ताला लगा है। हालांकि अखबार से होने की जानकारी पर कर्मचारी चाबी लेकर आ गया। स्टेशन अधीक्षक के कक्ष में भी ताला जड़ा था। सेटेलाइट बस अड्डा परिसर में कोई पुलिसकर्मी दिन में तैनात नहीं है हालांकि चौकी पास में है। महिला पुलिसकर्मी नहीं बैठती तो अकेली महिला यात्री अपनी शिकायत लेकर जाने में झिझकती हैं।
बस अड्डे पर कोई पुलिसकर्मी हमारी तरफ से नहीं रहते हैं, यदि कोई घटना घटती है तो पुलिस को बुलाया जाता है।-लक्ष्मी राठौर, स्टेशन इंचार्ज, पुराना बस अड्डा
यहां सुरक्षा के लिए सुबह 6 से 2 और दोपहर 2 से रात 10 बजे तक महिला पुलिस कर्मी तैनात रहती हैं। वहीं पुरुष पुलिसकर्मी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रहते हैं। महिलाओं के मार्गदर्शन के लिए महिला इंचार्ज पूनम सक्सेना उनके कक्ष में बैठती हैं।-सुरिंदर कुमार भसीन, स्टेशन इंचार्ज सेटेलाइट बस अड्डा
मेरी तैनाती दो माह पूर्व हुई है, अभी तक कोई महिला किसी भी तरह की शिकायत लेकर नहीं आई, ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।-पूनम सक्सेना, महिला इंचार्ज सेटेलाइट बस अड्डा
रविवार को सफाई का भी अवकाश
पुराना बस अड्डा हो या फिर सेटेलाइट रविवार को दोनों जगह सफाई भी नहीं होती है। दोनों बस स्टेशनों पर गंदगी पड़ी थी। स्टेशन इंचार्ज सुरिंदर कुमार भसीन का कहना था कि यहां सुबह-दोपहर-शाम तीन बार सफाई होती है लेकिन ये फल-ठेली और डग्गामार वाहन की वजह से गंदगी बढ़ जाती है।
क्या कहती हैं सेटेलाइट बस अड्डे पर पहुंचीं महिला यात्री
रात में कभी सफर नहीं करती हूं। अंजान व्यक्तियों के कारण डर बना रहता है। पूर्व में सफर में बस ड्राइवर और कंडक्टर ने ही छेड़छाड़ की थी, तब बस स्टेशन पहुंच कर पुलिस में शिकायत की थी। बस यात्रा महिलाओं के लिए रात में सुरक्षित नहीं है।- महिला यात्री
घरवाले अकेले बस में सफर के लिए मना करते हैं। यहां पर कोई पुलिस भी नहीं दिख रही है।रात होने पर लड़कियों में असुरक्षा की भावना और बढ़ जाती है।-साक्षी यादव, यात्री
फिरोजाबाद से हूं और पहली बार सफर कर रही हूं। रात में यात्रा नहीं कर सकती। पुरुष यात्री बस में जगह भी नहीं देते हैं। -महिला यात्री
पुराना बस अड्डे पर क्या कहते हैं यात्री
यहां पर गंदगी काफी है। पुलिस सुरक्षा और शिकायत केंद्र भी होना चाहिए। पर यहां कुछ नहीं दिख रहा है।-आफताब, पुराना बस स्टैंड
महिला पुलिस होनी चाहिए। यहां, रात के समय ज्यादा चौकन्ना रहना पड़ता है। अपनी सुरक्षा खुद ही करनी पड़ती है। -सुधा, पुराना बस स्टैंड
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