Israel-Hamas War: चमड़ा निर्यातकों के फंसे 400 करोड़, चमड़ा कारोबारी बोले- वैश्विक बाजार में आयी मंदी की आहट

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Edited By Amrit Vichar
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इजराइल जंग में कानपुर के चमड़ा निर्यातकों के फंसे 400 करोड़।

इजराइल जंग में कानपुर के चमड़ा निर्यातकों के 400 करोड़ फंसे। चमड़ा कारोबारियों ने कहा कि वैश्विक बाजार में मंदी की आहट आयी। वहीं, महीने भर में स्थिति साफ होगी।

कानपुर, [राजीव त्रिवेदी]। इजराइल-हमास जंग की वजह से शहर के लगभग 400 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार फंसने का अनुमान है। हालात पर नजर रखे चमड़ा निर्यातकों का यह भी मानना है, कि अचानक बदली वैश्विक स्थिति से क्रिसमस के ग्लोबल बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है। निर्यातकों में डर है कि यदि ऐसा होता है तो उनका लगभग 1 हजार करोड़ रुपये का कारोबार इस वर्ष प्रभावित होगा। फिलहाल निर्यातक महीनेभर में स्थिति साफ होने का अनुमान लगा रहे हैं। 

निर्यातकों ने बताया कि कानपुर से इजराइल में सेफ्टी बूट और शूज, सेडलरी, बैग, चमड़ा सहित अन्य उत्पादों का निर्यात होता है। यह निर्यात मांग के अनुसार लगभग छह से आठ सौ करोड़ रुपये के आस-पास है। ऐसे में इजराइल पर हुए हमले के बाद चार से पांच सौ करोड़ के ऑडर के रुकने या देरी होने की आशंका है।

निर्यातक कहते हैं यह स्थिति यदि लंबे समय के लिए चलती है तो शहर के निर्यात पर इसका लंबे समय तक असर पड़ेगा। 
बाजार की स्थिति पर लेदर इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट व काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के सीओए असद ईराकी ने कहा कि वहां के बाजार और यूरोपियन बाजार पर क्या असर पड़ेगा इसका आकलन वे लोग कर रहे हैं। निश्चित रूप से ऑर्डर रुकेंगे भी और देरी भी होगी। 

क्रिसमस की चल रही तैयारी

इजराइल और हमास के बीच हुई जंग से यूरोपीय देशों में होने वाले निर्यात की तैयारियों पर संकट आ गया है। सना इंटरनेशनल एक्जिम के निदेशक डॉ. जफर नफीस ने बताया कि शहर में इस समय चमड़ा उत्पाद के निर्यातक क्रिसमस की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

शहर से अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्वीडन, रोमानिया सहित अन्य यूरोपीय देशों में चमड़े के उत्पाद जाते हैं। इनमें ओवरकोट, बूट, शूज, हैट, ज्वैलरी, खुला चमड़ा व अन्य चमड़े के उत्पाद शामिल हैं। ऐसे में यदि ग्लोबल मार्केट इजराइल और हमास की जंग से प्रभावित होता है तो नुकसान एक हजार करोड़ के आस-पास पहुंच जाएगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध की मार पहले से

निर्यातकों ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद वैश्विक बाजार कुछ सामान्य हुआ ही था कि यूक्रेन-रूस से वैश्विक बाजार कमजोर हो गया। युद्ध की वजह से रूस से गैस यूरोपीय देश नहीं जा सकी। इससे यूरोपीय देशों में गैस बहुत अधिक महंगी हो गई। इस वजह से लेदर फैशन का बाजार कमजोर हो गया था। इसकी वजह से लेदर के उत्पादों की मांग कम हो गई थी। इसके अलावा कई देशों में निर्यात करने में भी मुश्किलें आ गई थीं।

 

 

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