Kanpur News: मूंगफली के छिलके से बनी डाई चमकाएगी कपड़े... प्रदूषण का भी खतरा नहीं, CSA के विशेषज्ञों ने किया तैयार
कानपुर में सीएसए के विशेषज्ञों ने मूंगफली के छिलके से बनी डाई कपड़े चमकाएगी।
कानपुर में अब मूंगफली के छिलके से बनी डाई कपड़े चमकाएगी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने तैयार किया। इस डाई से प्रदूषण का खतरा भी नहीं है।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। सोचिये कपड़ा ऐसा हो जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी किरणों से बचाए और जीवाणुओं के हमले से सुरक्षा करे तो कितना बेहतर होगा। शरीर कई तरह के रोगों से सुरक्षित रह सकेगा।
इस कल्पना को सच चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के विशेषज्ञों ने किया है। उन्होंने मूंगफली के छिलकों से हर्बल डाई बनाई है, जिससे धोने से कपड़ों में चमक आ जा रही है। यह पैराबैंगनी किरणों और जीवाणुओं के हमले से बचाएगी। शोध को अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
सीएसए के कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस के वस्त्र एवं परिधान विभाग की प्रो. रितु पांडेय के नेतृत्व में एमएससी की छात्रा श्वेता पटेल ने मूंगफली के बेकार छिलके से इसे तैयार किया है।
इस कार्य में राजस्थान के सेंट्रल शीप एंड वूल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. सीको जोश और मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के डॉ. पिंटू पंडित ने सहयोग किया। प्रो. रितु पांडेय के मुताबिक डॉ. सीको जोश ने डाई व कपड़े की केमिकल और मैकेनिक टेस्टिंग की, जबकि डॉ. पिंटू पंडित ने डाई के बाद कपड़े की पैराबैगनी किरणों और जीवाणुओं के हमले की जांच की।
डाई तैयार करने की कीमत न के बराबर
प्रो. पांडेय के मुताबिक मूंगफली के छिलके से डाई तैयार करने की कीमत न के बराबर है। उन्होंने बताया कि चिक्की बनाने वाली फैक्ट्रियां और इकाईयां दाने के ऊपर हल्के भूरे व गुलाबी छिलकों को फेंक देती हैं। यह उनके किसी काम की नहीं होती है। इन छिलकों की भूसी को 100 ग्राम मात्रा में लेकर एक लीटर पानी में आधे घंटे के लिए उबाला गया।
पानी को छान कर फिर से एक बार भूसी को साफ पानी में उबाला।दोनों बार के पानी एक ही में मिला लिया गया। इस पानी का तापमान 80 से 90 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा। अब इसमें रंगने वाले कपड़े को डाल दिया। करीब आधे घंटे के बाद निकाल लिया गया। इसमें एक बात का ध्यान रखना है कि जितने वजन का कपड़ा रंगना है उतने ही वजन की भूसी लेनी है।
रेशमी और ऊनी कपड़ों पर अच्छी रंगत
यह डाई सूती, ऊनी और रेश्मी तीनों वस्त्रों के लिए बेहतर है, लेकिन इसकी सबसे अच्छी रंगत रेशमी और ऊनी कपड़ों पर आती है। सूती कपड़ों को गाढ़ा रंग करने के लिए 45 मिनट से एक घंटे तक रंगना पड़ता है। डाई से तैयार रंग की जांच उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान में भी हुई है। कपड़ों पर डिजाइन के लिए राजस्थान बंधेज और प्रिंटिंग पर परीक्षण किया गया, जिसके परिणाम काफी बेहतर आए हैं। कपड़े धुलने के बाद चमक जा रहे हैं।
प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के लिए भी कारगर
प्रो. रितु के मुताबिक हर्बल डाई का प्रिंटिंग टेक्नोलाजी में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। विश्वविद्यालय में इस पर किए गए परीक्षण में नतीजे अच्छे आए हैं। सबसे पहले डाई को सुखा लिया। उसमें अलसी का तेल मिलाया गया। इस घोल को प्रिंटिंग इंक की तरह उपयोग किया गया। डाई तैयार करने की तकनीक काफी आसान है, इसको किसान आसानी से तैयार कर सकते हैं।
