Kanpur: GSVM के डॉक्टर पीड़ित के लिए भगवान हुए साबित… जांघ का मांस मुंह में लगा कैंसर रोगी की बचाई जान, इतने घंटे चला ऑपरेशन
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाई।
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर मरीज के लिए भगवान साबित हुए। डॉक्टरों ने जांघ का मांस मुंह में लगा कैंसर रोगी की जान बचाई। सात घंटे तक पीएमएसएसवाई में जटिल ऑपरेशन चला।
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीज के लिए भगवान साबित हुए। अधेड़ के मुंह के अंदर दोनों गालों में कैंसर होने से उसके होंठ तक खत्म हो गए थे। डॉक्टरों ने सात घंटे चले ऑपरेशन में जांघ के मांस से मुंह का नया आकार बनाकर पीड़ित को नई जिंदगी दी। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक अपनी तरह का यह प्रदेश में पहला ऑपरेशन है।
कानपुर देहात का 50 वर्षीय अधेड़ करीब 30 सालों से गुटखा, पान व पान मसाले का सेवन कर रहा था। इस कारण मुंह में कैंसर होने से होंठ तक नष्ट होने लगे थे। परिजनों के मुताबिक कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद मरीज को 10 दिन पहले हैलट अस्पताल लाए थे। यहां जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला के निर्देश पर मरीज की बायोप्सी में मुंह के अंदर दोनों गालों में कैंसर पाया गया।
इसके बाद मरीज की सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में माइक्रोस्कोप मशीन की मदद से सर्जरी की गई। प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया सात घंटे तक चले आपरेशन में मरीज की जांघ का मांस काटकर मुंह में लगाया गया। इससे कैंसर के कारण बिगड़ चुके मुंह के अंदर व बाहर का हिस्सा बनाया गया। दो दिन मरीज को आईसीयू में रखा गया। अब वह पहले के मुकाबले स्वस्थ है।
ऑपरेशन टीम में प्राचार्य के साथ प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर, डॉ.आशीष, एनेस्थीसिया के डॉ.ज्ञानेंद्र का सहयोग रहा। प्राचार्य के मुताबिक प्रदेश का यह पहला केस है, जिसमें मुंह के अंदर जांघ का मांस लगाया गया है। इसके अलावा मरीज की गर्दन में गांठ भी हो गई थी, उसे भी निकाला गया। निजी अस्पतालों में ऐसे आपरेशन पर पांच लाख तक खर्च आता है।
उपमुख्यमंत्री ने भेजा था यहां पर
कानपुर देहात निवासी मरीज के परिजनों के मुताबिक वह सब जगह दौड़कर थक चुके थे, अधिकांश डॉक्टरों ने जीवन के कुछ साल ही शेष होने बात कही थी। इस पर लखनऊ में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। उन्होंने मरीज को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी और कॉलेज के प्राचार्य समेत डॉक्टरों पर भरोसा जताया था।
