बदायूं: राज्यपाल को भेजा गया समन निरस्त, एसडीएम न्यायिक कोर्ट को चेतावनी

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Edited By Amrit Vichar
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जमीन के विवाद को लेकर एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने राज्यपाल को भेजा था समन

बदायूं, अमृत विचार। तहसील सदर के एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने जमीन से जुड़े एक विवाद में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को समन भेजकर कोर्ट में पेश होने का आदेश जारी कर दिया। समन राजभवन पहुंचा तो राज्यपाल के विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह ने डीएम को पत्र लिखकर आपत्ति जताई और कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिसके बाद डीएम ने समन निरस्त कर दिया है। एसडीएम न्यायिक कोर्ट को इस तरह की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी है। फाइलों को सही प्रकार से पढ़कर ही हस्ताक्षर करने को कहा है। 

मामला तहसील सदर क्षेत्र के गांव लौड़ा बहेड़ी का है। गांव निवासी चंद्रहास ने एसडीएम न्यायिक विनीत कुमार की कोर्ट में धारा 144 राजस्व संहिता के अंतर्गत लेखराज, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और राज्यपाल को पक्षकार बनाते हुए 2019 में वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि बुआ की बहन के बेटे चंद्रपाल ने उनकी बुआ कटोरी देवी की तीन बीघा जमीन अपने नाम करा ली थी। जिसके बाद जमीन शहर के मोहल्ला ऊपरपारा निवासी लेखराज के नाम व्यक्ति को बेची।

कुछ दिनों के बाद एक बीघा जमीन बाईपास के लिए अधिग्रहित हुई। जिसके एवज में लेखराज को वर्ष 2020 में 15 लाख रुपये की मुआवजा राशि मिली थी। जिसके बाद चंद्रहास ने एसडीएम न्यायिक कोर्ट में उसी जमीन की खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने की मांग की। एसडीएम न्यायिक ने 10 अक्टूबर को राज्यपाल को समन जारी करके 18 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया।

16 अक्टूबर को राज्यपाल के विशेष सचिव बद्रीनाथ ने डीएम को पत्र भेजकर आपत्ति व्यक्त की। कहा कि राज्यपाल को समन या नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। राज्यपाल को समन भेजकर संविधान के अनुच्छेद 361 का उल्लंघन किया गया है। जो घोर आपत्तिजनक है। डीएम मनोज कुमार ने समन निरस्त किया। साथ ही एसडीएम न्यायिक को पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी है।

वाद दायर करने वाले को नहीं नोटिस की जानकारी
एसडीएम न्यायिक कोर्ट से राज्यपाल को समन जारी होने के बाद जिला प्रशासन से लेकर शासन तक में खलबली मच गई है लेकिन वाद दायर करने वाले चंद्रहास को नोटिस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि बुआ उनके साथ रहती थी। वह ही सेवा करते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने बुआ की जमीन पर अपना हक बताया। जिसका चंद्रपाल ने फायदा उठा लिया।

राज्यपाल के विशेष सचिव का पत्र मिला था। समन निरस्त करा दिया गया है। एसडीएम न्यायिक को इस तरह की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों को कहा गया है कि आदेश को पूरी तरह से पढ़कर ही हस्ताक्षर करें--- मनोज कुमार, डीएम।

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