पीलीभीत: कस्टडी में हिस्ट्रीशीटर की मौत, आखिर क्या छिपा रहे पुलिस अधिकारी?
पीलीभीत, अमृत विचार। पत्नी की ओर से की गई सुलह के लिए शिकायत में भारी भरकम दबिश देने के बाद हिरासत में लिए गए हिस्ट्रीशीटर की मौत के मामले में पीलीभीत पुलिस के अधिकारियों की कार्यशैली कई सवाल खड़े कर गई। दिनभर की टालमटोल में आखिर जिम्मेदार क्या छिपाना चाह रहे थे। यह सवाल घटना के बाद उठ रहे सवाल और परिवार के आरोपों को बल दे गया ।
बिलसंडा के गांव पहाड़गंज के निवासी मृतक बशी खां के परिवार के बरखेड़ा पुलिस के साथ ही अन्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। मृतक चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई जमीर खान ने बताया कि जिस वक्त पुलिस ने दबिश दी थी वह घर पर ही थे। गेट खोलते ही पुलिसकर्मी वसी खां पर टूट पड़े।
घर में पीटने के बाद बसी अहमद को बाहर चौराहा पर ले जाकर भी पीटा। इसके बाद बिलसंडा रोड पर एक पुलिया पर गाड़ी से उतारा और वहां भी पीटते रहे। छोटे भाई की पत्नी, बेटी और बेटे तक को पुलिस पीटती रही। वह पीछा करते हुए बरखेड़ा थाने भी रात को पहुंचे।वहां बेसुध हालत में बसी खां मिला। जैसे ही उसके हाथ पर हाथ रखा उसने कसकर पकड़ लिया था। फिर पुलिसकर्मियों ने भगा दिया। इसके बाद सीधे बसी की मौत की जानकारी हुई।उन्होंने साफ कहा कि बरखेड़ा पुलिस ने ही पीटकर उनके भाई की जान ली है।
पुलिस ने गिनाए 20 मुदकमे, परिजन ने दी सफाई
हिरासत में युवक की मौत होने के बाद मामले को लेकर पुलिस विभाग में खलबली मची रही। मृतक के ऊपर 2005 से 2019 तक के बीस मुकदमे दर्ज होने का रिकॉर्ड पेश किया गया। जिसमें हत्या, जानलेवा हमला, गैंगस्टर एक्ट आदि के मुकदमे शामिल थे। उधर, परिवार वालों ने इसे लेकर भी अपनी सफाई दी।
उन्होंने कई मुकदमे होने की बात स्वीकार की। भाई जमीन ने बताया कि पिछले कई साल से उसका किसी मुकदमे में कोई नाम नहीं रहा। वह खेती करने लगा था। उसका ना तो कोई वारंट कटा था, न ही कोई अन्य शिकायत हुई थी। एक दिन पूर्व भी शिकायत पत्नी ने की थी और सुलह कराने की गुहार लगाई थी। मगर पुलिस ने किसी बड़े गुडवर्क को दिखाने के चक्कर में पीटकर जान ले ली।
हर तरफ दिखा पुलिस का पहरा
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों को भी विरोध का डर सताता रहा। शायद यही वजह रही कि मृतक के गांव से लेकर पोस्टमार्टम हाउस पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया। माधोटांडा, सुनगढ़ी, जहानाबाद समेत कई थानों की पुलिस मुस्तैद कर दी गई। मृतक के गांव, मोर्चरी और पोस्टमार्टम पर भी कई थानों की पुलिस दिखी। अफसर पल-पल की अपडेट लेते रहे।
सीएचसी में बताई थी पलटी आने की शिकायत
मृतक की एंट्री बरखेड़ा सीएचसी के अभिलेखों में रात करीब साढ़े दस बजे के आसपास की है। जिसमें उसे पलटी आने की शिकायत बताते हुए पुलिस लेकर गई थी। इसके बाद वहां से रेफर कर दिया गया था। ऐसे में सीएचसी में ले जाने तक उसके जिंदा होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा एक चर्चा ये भी है कि तीस जुलाई को हुई शराब की दुकान की चोरी के मामले में पुलिस बसी खां को पकड़कर लाई थी। मगर, गुडवर्क के पहले ही बैडवर्क में पुलिस घिर गई। इसे लेकर भी चर्चाएं तेज रही।
पहले पुलिस से भिड़ने का भी मचा शोर
बता दें कि मृतक वशी खां बिलसंडा थाने का हिस्ट्रीशीटर भी था। उसे पकड़ने के लिए जब पुलिस गई थी तो टीम से भी भीड़ भिड़ गई थी। जिसके बाद भारी पुलिस बल पहुंचा था। पिटाई को लेकर इसे ही वजह बताते हुए क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई है। हालांकि अधिकारिक तौर पर पुलिस के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
शव पहुंचने से पहले ही गांव में सीओ ने मोर्चा संभाला
शव का पैनल से पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद परिजन उसे लेकर गांव के लिए निकले। उधर गांव में भीड़ जमा हो चुकी थी। किसी तरह का विरोध न हो इसके लिए सीओ बीसलपुर सतीश चंद्र शुक्ला को मौके पर भेज दिया गया। गांव छावनी में तब्दील रहा। अफसर पूरे मामले में बचते नजर आए।
एएसपी बोले - शनिवार सुबह पता लगेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
हिस्ट्रीशीटर की हिरासत में मौत के बाद एक तरफ परिवार पुलिस पर आरोप लगा रहा था। उस पर पुलिस अधिकारियों की टालमटोल कार्यशेली पर सवाल खड़े करती रही। दिनभर घटना की स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रेसनोट जारी करने की बात कही जाती रही।
उधर देर शाम पोस्टमार्टम में मृतक के चोटें निकलने और हार्ट अटैक से जान जाने का शोर मचा रहा। मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस अफसर नहीं कर सके। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार यादव का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पता नहीं लगा है। इसकी स्थिति शनिवार को स्पष्ट हो सकेगी। परिवार से किसी तरह की तहरीर नहीं मिली है।
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