देवांश लॉज मामला: डकैती सहित अन्य धाराओं के आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली राहत

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Edited By Amrit Vichar
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अग्रिम निर्धारित तिथि तक गिरफ्तारी पर लगाई गई है रोक, पुलिस जांच में सहयोग करने पर ही प्रभावी होगा उच्च न्यायालय का आदेश

कासगंज, अमृत विचार। शहर की विवादित और चर्चित संपत्ति देवांश लॉज के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर  में  डकैती सहित अन्य धाराओं के आरोपियों को उच्च न्यायालय से राहत मिल गई है, लेकिन यह राहत आंशिक है। अग्रिम सुनवाई के लिए नियत तिथि तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि पुलिस जांच में सहयोग करने पर ही आरोपियों को राहत मिल सकेगी। इसके अलावा प्रतिवादी से भी शपथ पत्र मांगा गया है।। मामला नए मोड़ पर आ गया है। 

शहर के नदरई गेट क्षेत्र में देवांश लॉज की संपत्ति विवादित है। यहां गाटा संख्या 36, 37, 38 को लेकर विवाद बना हुआ है। इधर मामला अभी शांत नहीं हुआ है। मामले में पीड़ित बैजनाथ अग्रवाल ने न्यायालय का सहारा लेकर पूर्व में कार्रवाई कराई। उन्होंने न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में लिखा कि उनके सगे भाई कैलाशनाथ अग्रवाल के बेटे अजय अग्रवाल ने भू माफियाओं से षड्यंत्र कर एक फर्जी दावा कराया और कैलाशनाथ बनाम राहुल कुमार आदि के नाम से दायर किए गए दावे में जो आदेश हुआ उसका उल्लंघन भी किया गया। 

उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए तथ्य प्रस्तुत किए। गाटा संख्या 37 व 38 में हस्तक्षेप न करने के संबंध में आदेश कर लेने का भी पक्ष रखा और लिखा कि बीती 20 जुलाई को सुबह लगभग 10 बजे अजय अग्रवाल निवासी नदरई गेट, अश्विनी चतुर्वेदी निवासी नदरई गेट, राहुल कुमार निवासी मुहल्ला नवाब एवं लेखपाल प्रदीप ने अवैध रूप से कब्जा कराया। आरोप है कि 15-20 अज्ञात लोग ट्रैक्टर और जेसीबी लेकर पहुंचे। जबरन मौके पर फीता डालकर नापतोल कर दी। जब जानकारी हुई तो पीड़ित मौके पर पहुंचा और अपने हिस्से पर जबरन कब्जा करने से पहले रोका तो उसे डरा धमका कर भगा दिया। 

पीड़ित का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के विरुद्ध जाकर इन सभी लोगों ने गाटा संख्या 38 में बनी बाउंड्रीवाल, बनी दुकान तोड़कर अंदर घुस गए और गाटा संख्या 37 में स्थित देवांश लॉज की बिल्डिंग को जबरन जेसीबी से तोड़ने लगे। उसमें रखा सामान लूट लिया। 25 से 30 लाख रुपए का सामान जबरन लूट ले गए और भवन को भी काफी क्षति पहुंचाई। जिससे लगभग चार करोड रुपए का नुकसान हुआ है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां से एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद विवेचना शुरू कर दी है। नदरई गेट चौकी इंचार्ज को विवेचना सौंपी गई है। 

इधर, डकैती, साजिश सहित अन्य और धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर के बाद आरोपियों में खलबली मच गई और उन्होंने उच्च न्यायालय का सहारा लिया। गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने के लिए उच्च न्यायालय में अनुरोध दिया। उच्च न्यायालय से अब इन चार आरोपियों को राहत मिल गई है। इनकी गिरफ्तारी पर अग्रिम सुनवाई की तिथि तक डिविजनल बैंच ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इससे पहले प्रतिवादी से शपथ पत्र मांगा गया है। उच्च न्यायालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी पुलिस जांच में सहयोग करेंगे तभी इस आदेश का लाभ ले सकेंगे।

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