बरेली: करवा चौथ पर 50 सालों बाद विशेष संयोग, ये काम करते ही पति की उम्र होगी दीर्घायु, जानिए विधि

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुहागन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जो इस बार एक नवंबर को पड़ रहा है। विद्वानों के अनुसार इस बार करवा चौथ के अवसर पर विशेष संयोग बन रहे हैं।

यही वजह है कि इस बार करवा चौथ का व्रत सुहागिनों के लिए पूर्ण फलदायी होगा। वहीं इसको लेकर बरेली के ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत दीक्षित ने बताया कि मंगलवार रात्रि साढ़े नौ बजे से चतुर्थी तिथि का प्रांरभ हो रहा है। जो 1 नवंबर यानी बुधवार रात्रि 9:19 बजे तक रहेगी। 

ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से करवा चौथ का व्रत बुधवार को किया जाएगा। वहीं इस करवा चौथ के दिन बुधादित्य योग, शिवयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग देखने को मिल रहा है। इस दिन अगर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन साथी के लिए व्रत रखता है तो वह पूरी तरह फलदायी होता है। यह योग 50 से भी अधिक सालों बाद इस बार देखने को मिलेगा। 

करवा चौथ के दिन रात्रि में चंद्र दर्शन का समय 8:26 बजे का है। वहीं ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया कार्य या पूजा शुभ फल प्रदान करती है। बताया जाता है कि इस दिन सुबह को दैनिक कार्यों को करने के बाद सभी देवताओं को स्मरण कर हाथ में जल, चावल, रोली एवं पुष्प लेकर मंत्र 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये' बोलने के साथ व्रत का संकल्प लेकर एक बर्तन में छोड़ दें।

वहीं शाम के समय पीली मिट्टी से गौरी माता की प्रतिमा बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बिठाकर चौकी पर स्थापित करें। जिन्हें चुनरी ओढ़ाएं और सुहाग की सामग्री मां पार्वती को अर्पित करें। इसके बाद आठ पूड़ियों की अठावरी बनाएं, साथ में कुछ मीठा और पकवान बनाकर प्रसाद के रूप में रखें।

पूजा के समय जल से भरा एक लोटा रखें। वहीं बयना देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। जिसमें गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें और उस पर दक्षिणा रखकर कथा सुनें। उसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति, सास-ससुर के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करें।

न पहनें ऐसी साड़ी
सुहागिन स्त्रियों को हरे, काले और नीले रंग की साड़ी पहनने से बचना चाहिए। वहीं, लाल साड़ी पहनना शुभ माना जाता है। किसी परिस्थिति में लाल साड़ी उपलब्ध न हो तो पीली, महरूम रंग की साड़ी भी को प्राथमिकता दी जा सकती है।

व्रत में इन बातों का रखें खास ख्याल
व्रत को धारण करने पर सभी प्रकार की कामना और वासना का त्याग कर देना चाहिए। इसके बाद अपने भगवान और इष्ट देव की पूजा करनी चाहिए। साथ ही अपने पति की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए।

करवा चौथ की सामग्री
इस व्रत में पूजा सामग्री का विशेष महत्व है। पूजा के समय थाल में मिट्टी या तांबे का करवा और ढक्कन, पान, कलश, चंदन, फूल, हल्दी, अक्षत, मिठाई, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, बूरा, रोली या कुमकुम, मौली, छलनी, कांस की तीलियां, पानी भरा लोटा, दीपक, मिट्टी की पांच डेलियां, सिंदूर, सुहाग के 16 शृंगार का पूरा सामान, पका हुआ भोजन, हलवा, व्रत कथा की किताब, करवा माता की तस्वीर होनी चाहिए।

पूजा के वक्त इस दिशा में चेहरा करके बैठना शुभ
वास्तु शास्त्रों के अनुसार, पूजा करते समय जातक का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। इनमें पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। 

व्रत रखने से पहले ये बिल्कुल भी न करें
ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत दीक्षित बताते हैं कि जो सुहागिनें व्रत रखते समय सूर्य उदय से पहले भोजन-पानी ग्रहण कर लेती हैं। उससे व्रत का कोई महत्व नहीं रह जाता है। लेकिन बीती रात के 12 बजे से पहले खाने के बाद ब्रश करके मुह साफ कर लेना चाहिए, न कि जूठे मुंह रहना चाहिए। साथ ही व्रत के दौरान महिलाओं के मुंह से भोजन की महक भी आना नहीं चाहिए। इसके बाद शाम को पूजा तक कुछ नहीं खाना चाहिए।

स्वास्थ्य से कमजोर महिला कर सकती है ये काम 
ज्योतिषाचार्य पंडित रमाकांत दीक्षित कहते हैं कि वैसे तो सनातन धर्म में चंद्रमा को जल चढ़ाकर ही जल पिया जाता है। लेकिन कोई स्वास्थ्य के कारण विवश है या कमजोर है तो वह शुभ समय में पूजा कर लें और जल आदि ग्रहण कर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दे सकती है।

ये भी पढ़ें - बरेली: टेली रेडियोलॉजी करने वाली संस्था कृष्णा डायग्नोस्टिक की प्रगति शून्य, नोटिस

 
 

 

 

संबंधित समाचार