कानपुर की सड़कों पर हादसों का खूनी दाग और गहरा, शहर प्रदेश में पहला, देश में चौथे नंबर पर

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कानपुर की सड़कों पर हादसों का खूनी दाग और गहरा।

कानपुर की सड़कों पर हादसों का खूनी दाग और गहरा है। सड़क हादसों में मौतों के मामले में शहर प्रदेश में पहले नंबर पर है। जबकि देश में चौथे नंबर पर है। ओवरस्पीड से हादसों में तीन चौथाई युवा जान गंवाते है।

कानपुर, अमृत विचार। यातायात नियमों का पालन नहीं करने, सावधानी से वाहन नहीं चलाने के कारण कानपुर के माथे से सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतें से लगने वाला खूनी दाग छूट नहीं रहा है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में हुए सड़क हादसों में मौतों के मामले में कानपुर का स्थान देश भर में चौथा रहा। कानपुर में वर्ष 2022 में 640 लोगों को मार्ग दुर्घटनाओं में जान गंवानी पड़ी और करीब 2200 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 

रोड सेफ्टी की रिपोर्ट में कानपुर की सड़कों को पहले ही असुरक्षित करार दिया गया था। अब सड़क परिवहन मंत्रालय ने शहर में सड़क हादसों में मौत का आंकड़ा पिछले साल से करीब आठ  फीसदी ज्यादा दर्ज किया है। वर्ष 2021 में कानपुर में 1354 दुर्घटनाओं में 598 मौत के मामले दर्ज किए गए थे। सड़क पर होने वाले हादसों का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 68 फीसदी सड़क हादसे ओवरस्पीड के कारण होते हैं। ओवरस्पीड और हेलमेट का प्रयोग नहीं करने के कारण सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें युवाओं की होती हैं। यातायात नियमों की अनदेखी भी हादसों की बड़ी वजह है।

जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में हुए सड़क हादसों में 18 से 45 साल के 72 फीसदी युवा मौत का शिकार हो गए। कानपुर में होने वाली मार्ग दुर्घटनाओं में भी यह आंकड़ा और डराने वाला है। यहां ओवरस्पीड और यातायात नियमों की अनदेखी करने के कारण होने वाले सड़क हादसों में जान गंवाने वाले युवाओं का प्रतिशत 75 फीसदी से कुछ ज्यादा रहा। 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में वर्ष 2022 में 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों की मौत के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। वर्ष 2021 में जहां 7,764 किशोरों की मौत सड़क हादसों में हुई थी, वहीं वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 9,528 पहुंच गया है। इस तरह एक साल के भीतर किशोरों की मौत के मामले में 22.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

इस मामले में भी कानपुर पीछे नहीं है। यहां भी सड़क हादसों में होने वाली मौतों में किशोरों की मौतों की संख्या में बीते साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक दर्ज की गई है। इसके पीछे  माना यह जाता है कि किशोरों के हाथों में कार या बाइक आते ही उनकी रफ्तार को और गति मिल जाती है। यही वजह हादसा होने पर उनकी या राहगीरों की मौत का कारण बनता है। 

पिछले हफ्ते नाबालिगों ने ली दो की जान

पिछले हफ्ते ही नवाबगंज थाना क्षेत्र में गंगा बैराज के पास तेज रफ्तार में कार दौड़ा रहे नाबालिगों ने दो किशोरों को रौंद दिया था। कार चालकों ने बैराज पर छह मैगी दुकानों को भी टक्कर मारी थी जिससे दुकानें तहस-नहस हो गई थीं। शहर में स्कूटी और बाइक दौड़ाते नाबालिग रोज दिखते हैं। यातायात नियमों की उन्हें परवाह नहीं और न ही उनके माता-पिता उन्हें वाहन देने में हिचकते हैं।

रोकथाम के लिए एक्शन प्लान

1.    ब्लैक स्पॉट यानी सड़कों पर दुर्घटना बाहुल्य वाले स्थानों पर सुधार कार्य। 
2.    हाईवे पर गति सीमा संकेतक लगाकर तेज रफ्तार वाहनों के कैमरे से चालान करना। 
3.    सड़कों के किनारे वाहनों का खड़ा होना रोकना और अतिक्रमण हटाना। 
4.    सड़कों के बीच बनाए गए अवैध कट तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना। 
5.    डिवाइडरों के बीच लगाए पेड़ों की समय-समय पर कटाई और छंटाई करना। 
6.    हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं पहनने वालों के लगातार चालान की व्यवस्था। 
7.    उल्टी दिशा से चलने वाले वाहनों या लेन तोड़ने वालों को रोकना जुर्माना लगाना। 
8.    दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में एंबुलेंस की तैनाती करना, समीप में ट्रामा सेंटर बनाना।

हाल के कुछ बड़े हादसे

-1 अक्टूबर को घाटमपुर में कोरथा जहां ट्रैक्टर ट्राली के बंबे में पलटने से 26 लोगों की मौत हो गई थी। 
-9 दिसंबर को धरमपुर बंबा के पास उल्टी दिशा में आ रहे ट्रक की टक्कर से तीन भाइयों की मौत। 
-2 मार्च को घाटमपुर नौरंगा मार्ग पर पेड़ से टकराई पिकअप, तीन लोगों की मौत। 
-13 सितंबर को बिधनू में डंपर की टक्कर से पिकअप पलटी, दंपति समेत चार की मौत। 
-15 अक्टूबर को घाटमपुर कुष्मांडा मंदिर के पास डंपर ने हेड कांस्टेबल समेत दो को कुचला।
-15 अक्टूबर को घाटमपुर कोतवाली के नौरंगा गांव में अनियंत्रित ऑटो पलटा, दरोगा की मौत, छह घायल। 
-18 जुलाई को बिधनू के शंभुआ पुल के पास डंपर की टक्कर से भाई-बहन की जान गई। 
-25 जून को कानपुर सागर हाईवे पर तीन डंपरों की भिड़ंत के बाद लगी आग, चालक जिंदा जला।

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