लखनऊ: सुरक्षा को दरकिनार कर हो रहा पटाखा कारोबार, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। दीपावली के नजदीक आते ही दुबग्गा के अमेठिया सलेमपुर गांव में पटाखों का कारोबार धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा है। इसी के साथ सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी शुरू हो गई है। अब हाल यह है कि बाजारों में बने बेसमेंट के ठीक आगे ही गैस के चूल्हे जला चाय और खानपान की सामग्री तैयार की जा रही है। इसकी वजह से एक चिंगारी लोगों पर भारी पड़ सकती है।

ई-रिक्शा और पिकअप से भेजा जाता है बड़ी मात्रा में पटाखा

अमेठिया सलेमपुर की ग्राम प्रधान ममता रावत ने बताया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगने वाली पटाखा मार्केट में सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर हजारों क्विवंटल विस्फोटक ई-रिक्शा समेत पिकअप से शहर के अलग-अलग हिस्सों को भेजा जा रहा है। मामूली लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। नियमों के अनुसार पटाखा और बिक्री स्टॉल के पास आग नहीं होनी चाहिए, लेकिन यहां तो खुलेआम खान-पान, सिगरेट और घरेलू सिलेंडर से चाय बनाई जा रही है। और तो और आगजनी के ठोस प्रबंध तक बाजार में नहीं हैं।

अधिकारी बोले, सीमित हैं संसाधन, कर्मचारी पा लेते हैं आग पर काबू

मुख्य शमन अधिकारी के मुताबिक, शहर की तकरीबन 50 लाख की आबादी को आगजनी की घटनाओं से बचाने के लिए फायर बिग्रेड के पास कुल 32 दमकल गाड़ियां हैं। आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए हजरतगंज समेत शहर में आठ फायर स्टेशन हैं। सभी में आबादी के लिहाज से तय मानक से काफी कम गाड़ियां ही हैं, लेकिन सीमित संसाधन (इसमें कर्मचारी हों या फिर वाहन) के बावजूद दमकल कर्मी आग की घटनाओं पर काबू पाते हैं। दो गाड़ियां गड़बड़ हैं तो कर्मचारी भी कम हैं।

लखनऊ का सबसे बड़ा पटाखा बाजार

तमिलनाडु के शिवाकाशी से पटाखों की आपूर्ति होती है। तय मानकों का पटाखा थोक बाजार अमेठिया सलेमपुर पहुंचता है। यहां से अस्थायी लाइसेंस धारक और फुटकर पटाखा कारोबारी ब्रिकी के लिए माल खरीदते हैं। लाइसेंस मिलते ही फुटकर पटाखा व्यवसायी उसकी बिक्री शुरू करते हैं। सालाना करीब 10 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार हो जाता है। वर्ष 2016 में थोक पटाखा कारोबारियों को घनी आबादी से स्थानान्तरित कर शहर के बाहर अमेठिया सलेमपुर भेजा गया था। दुकानों के साथ ही गोदाम दिए गए हैं। यह लखनऊ का सबसे बड़ा पटाखा बाजार है।

                                                       महेश गुप्ता, अध्यक्ष लखनऊ आतिशबाजी वेलफेयर एसोसिएशन

अभी तक पुलिस कमिश्नरेट की ओर से अस्थायी पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस जारी और नवीनीकरण नहीं किए गए हैं। अस्थायी पटाखा व्यापारी को तीन दिन का लाइसेंस दिया जाता है। अगर थोक मार्केट में पटाखों की ब्रिकी हो रही है तो यह पूरी तरह से अवैध है। स्थानीय पुलिस खरीदे गए माल को जब्त कर सकती है।

                                                                                         मंगेश कुमार, सीएफओ

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