रायबरेली: हर दिन खतरे से होकर घर जाती है नौनिहालों की जिंदगी, रेल पटरियों से गुजरते हैं बच्चे

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Edited By Amrit Vichar
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लालगंज/रायबरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों के बच्चों के जीवन स्तर और उनके शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए चाहे जितना प्रयास कर ले लेकिन स्थानीय स्तर पर स्कूल आने वाले बच्चों की जिंदगी की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। एक बानगी ब्लॉक कार्यालय लालगंज के सामने स्थित लालगंज पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक राजकीय विद्यालय में हर देखने को मिलती है। 

इन दोनों स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां छुट्टी के बाद रेल पटरियों के अंदर से चलकर अपने घर जाते हैं। जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। इसे लेकर न तो शिक्षक ही संवेनशील हैं और न ही शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारी। शायद किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है।बताते हैं कि स्कूल से महज 100 मीटर दूर रेलवे क्रॉसिंग है और रेलवे क्रॉसिंग के राइट हैंड की रेल पटरी से बच्चे रोज अपने घर जाते हैं। रेल पटरी से होकर जाना बच्चों का अपने आप में जान जोखिम में डालने जैसा है। कानपुर ऊंचाहार रेलखंड पर कई रेलगाड़ियां का आवागमन है। 

खासतौर से मालगाड़ियां और रेल कोच से आने वाली कोच ट्रेनों का भी आवागमन बना रहता है जिसके कारण बच्चों की जिंदगी कभी भी खतरे में पड़ सकती है। कारण बच्चे झुंड के झुंड में पटरियों से होकर निकलते हैं। जबकि बच्चों के पीछे ही स्कूल के अध्यापक भी निकलते हैं लेकिन वह भी कभी इस गंभीर विषय की ओर ध्यान नहीं देते हैं।

वास्तव में सरकारी स्कूल होने के चलते बच्चों की चिंता अध्यापकों या अन्य जिम्मेदारों को नहीं रहती है। शनिवार को जब बच्चों को समझाने का प्रयास किया गया तो बच्चे हंसते हुए भाग गये। खंड शिक्षा अधिकारी लालगंज का कार्यालय भी रेलवे क्रॉसिंग से 100 मीटर दूर है। वह भी कभी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। आसपास के लोगों ने भी बच्चों के पटरियों के बीच से होकर जाने के बाबत चिंता जताई है। वास्तव में जब कोई कभी दुर्घटना घटित हो जाती है तब जिम्मेदार लोग नींद से जागते हैं। लोगों ने मामले की शिकायत डीएम से करने की बात कही है।

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