हल्द्वानी: मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की रडार पर नौ संदिग्ध छात्र

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Published By Bhupesh Kanaujia
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हल्द्वानी, अमृत विचार। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बीते शुक्रवार को हुए रैगिंग प्रकरण में कॉलेज प्रबंधन एक्शन मोड में आ गया है। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के 10 सीनियर छात्रों पर कार्रवाई के बाद अब 9 और संदिग्ध छात्र प्रबंधन की रडार पर हैं। इन छात्रों की पहचान के लिए हॉस्टल के सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं।

चार नवंबर को मेडिकल कॉलेज के छात्र हॉस्टल में एमबीबीएस के 4 जूनियर छात्रों से रैगिंग का मामला सामने आया था। इस पर प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने तत्काल अनुशासन समिति की बैठक बुलाई थी। बैठक में मामला एंटी रैगिंग कमेटी में भेजने की सहमति के बाद पांच नवंबर को कमेटी की बैठक हुई। जिसमें विचार-विमर्श के बाद आरोपी एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के 10 सीनियर छात्रों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना, 6 माह के लिए हॉस्टल से निष्कासित, एक सप्ताह के लिए क्लास से सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई थी।

सोमवार को प्राचार्य डॉ. जोशी ने कार्रवाई के आदेश जारी करते हुए बताया कि मामले की रिपोर्ट नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी), चिकित्सा शिक्षा निदेशक और वाइस चांसलर (वीसी) को भेजी जायेगी। प्राचार्य ने बताया कि मामले में शामिल 9 संदिग्ध छात्रों की पहचान के लिए हॉस्टल के सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। पहचान होते ही इन छात्रों पर भी कार्रवाई अमल में लाई जायेगी। कहा कि रैगिंग रोकने के लिए ठोस कदम उठाये जा रहे हैं। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शपथ पत्र और क्लीन चिट से मिलेगा एडमिट कार्ड
मेडिकल कॉलेज में नवंबर में एमबीबीएस कर रहे छात्र-छात्राओं की परीक्षा होनी है। ऐसे में रैगिंग प्रकरण में शामिल 10 सीनियर छात्रों का परीक्षा में बैठना मुश्किल है। कॉलेज प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए माता-पिता का एफिडेविट (शपथ पत्र) देने और वार्डन की क्लीन चिट मिलने के बाद ही एडमिट कार्ड दिया जायेगा।


रैगिंग में शामिल छात्रों की पहचान के लिए सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। पहचान होने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जायेगी। रैगिंग रोकने के लिए ठोस कदम उठाये जा रहे हैं।
- डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

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