लखीमपुर-खीरी: आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने फांसी लगा की आत्महत्या

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Edited By Amrit Vichar
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बैंक का कर्ज़,पत्नी की लंबी बीमारी और घर में आए दिन हो रहे झगड़े से परेशान था कृषक

पलिया कला, अमृत विचार। बैंक से कर्ज लेने के बाद उसकी देनदारी का दबाव, पत्नी की लंबी बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण घर में आए दिन हो रहे विवाद से परेशान एक किसान ने अपने खेत में खड़े शीशम के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

तहसील क्षेत्र के गांव शंकर पुरवा निवासी साठ वर्षीय किसान सुकई पर नौगवां की आर्यावर्त बैंक का लगभग एक लाख से अधिक का कर्ज था। पत्नी लीलावती काफी दिनों से बीमार चल रही थी, जिसका नौगवा के एक प्राईवेट क्लीनिक पर इलाज चल रहा था।

गरीबी के चलते थोड़ी बहुत जमीन थी वह भी उसने चालीस हजार में गिरवी रख दी थी। इसके बावजूद भी सुकई काफी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। इस कारण घर में भी आए दिन वाद- विवाद होता रहता था। इधर बैंक से कर्ज जमा करने के लिए बराबर दबाव बनया जा रहा था। इन सब बातों से परेशान सुकई ने अपने खेत में खड़े शीशम के पेड़ में लटक कर आत्महत्या कर ली।

सुकई के चार बेटों मे से एक बेटे की पहले ही मौत हो चुकी थी। अब उसके तीन बेटे व दो पुत्रियां हैं। सभी की शादी हो चुकी है। बेटे मेहनत मजदूरी कर जो कमा कर लाते थे ,उसी से घर का चूल्हा जलता था। उसके पुत्र रामू के मुताबिक आर्थिक तंगी से परेशान पिता काफी परेशान रहते थे।

शनिवार प्रातः करीब नौ बजे चाय पीकर घर से निकले थे। देर शाम तक घर न आने पर रातभर व दूसरे दिन रविवार को भी तलाश किया गया लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद मलंगा निवासी जब एक ग्रामीण खेत में घास काटने गया तो उसने उसके पिता को खेत में खड़े शीशम के पेड़ से फांसी पर लटके देखा।

इसकी सूचना उसने मृतक के घर वालों को दी मौत की खबर सुन घर में कोहराम मच गया। पश्चात दी गई सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को शील कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सोमवार शाम पोस्टमार्टम होने के बाद शव घर आने पर सभी विलख पड़े। पश्चात उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

एसडीएम व तहसीलदार पहुंचे मृतक के घर 
तहसीलदार आरती यादव के साथ मृतक के घर पंहुचे एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने मृतक किसान की बीमार पत्नी व परिजनों को ढाढ़स बंधा कर क्षेत्रीय लेखपाल को मृतक की पत्नी को वृद्धावस्था पेंशन व आयुष्मान कार्ड जल्द बनवाने की हिदायत दी। 
क्या कहते हैं बैंक मैनेजर
सुकई रेग्युलर ग्राहक था। बैंक की तरफ से न कोई नोटिस दी गई और न ही बैंक का कर्मचारी सुकई के कभी घर गया। बैंक पर आरोप लगाना ठीक नहीं---धीरेन्द्र कुमार मैनेजर आर्यावर्त बैंक।

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