पीलीभीत : किसी ने लिखा पदनाम, कोई जाति-धर्म प्रदर्शित कर दौड़ा रहा वाहन...कैसा यातायात माह!

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग माह नवंबर अभियान के दौरान भी सख्ती नहीं कर पा रहा। दुपहिया और चार पहिया वाहन खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते फर्राटा भर रहे हैं। वहीं बीते साल शासन स्तर से शुरू की गई मुहिम भी जनपद में आंकड़ेबाजी की भेंट चढ़ गई। जाति-धर्म और पदनाम लिखाकर को प्रदर्शित करने वाले स्लोगन और स्टीकरों को चस्पा कर वाहन दौड़ाए जा रहे हैं।

बता दें कि शहर की सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों की नंबर प्लेट और विंड स्क्रीन पर यादव, जाट, गुर्जर, ब्राह्मण, पंडित, क्षत्रिय, लोधी और मौर्या जैसे जातिगत या फिर धर्म को उजागर करते हुए स्टीकरों का फैशन तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा  वाहनों पर पदनाम लिखाकर धमक दिखाने वाले भी कम नहीं है। फिर चाहे अफसर हो या फिर राजनेता।

ऐसे तमाम वाहन सड़कों पर फर्राटा भरते दिखाई देते हैं। इन वाहनों को लेकर शासन स्तर से सख्ती की गई तो एक्शन दिखा था।  दोपहिया-चौपहिया वाहनों की नंबर प्लेट, विंड स्क्रीन पर जाति और धर्म की पहचान के तौर पर कोई स्टीकर नहीं लगाया जा सकेगा। इसके आदेश कर दिए गए थे।

शुरुआत में तो परिवहन और पुलिस विभाग ने इसका पालन कराने पर सख्ती की। एक  कार्यक्रम में शामिल होने गए  पूर्व विधायक की गाड़ी का भी वीडियो जाति धर्म प्रदर्शित करते स्टीकर लगा होने पर वायरल हो गया था। जिसके बाद फजीहत से बचने के लिए उन्हें अपनी कार पर लगा स्टीकर हटाना पड़ा था। कईयों के चालान भी किए गए।

चेकिंग के दौरान स्टीकर लगा मिलने पर मौके पर ही छुटवाए भी गए। मगर कुछ समय बाद मुहिम ठंडे बस्ते में चली गई। नतीजतन  जाति -धर्म और पद को प्रदर्शित करते हुए स्टीकरों के फैशन का बोलबाला दोबारा तेजी पकड़ चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इस पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई जा रही। अब न तो इन्हें वाहनों से हटवाया जा रहा, न ही कोई चालान कर रहा है।

हूटर की चेकिंग नहीं, हर तीसरा कार सवार वीआईपी
बात सिर्फ स्टीकर की चेकिंग तक सीमित नहीं है। बीते कुछ दिनों में ही खुद को वीआईपी दर्शाने वालों की भी फेहरिस्त काफी लंबी हो चुकी है। राजनीतिक या फिर किसी संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को एक नया शौक चढ़ा है। अधिकांश के चार पहिया वाहनों में हूटर लगे हुए हैं। वह जाम में फंसने या फिर रात के समय सफर करने पर खुलकर इसका प्रयोग कर रौब झाड़ते हैं। मगर, इस पर कोई अंकुश सिस्टम नहीं लगा सका है।

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