बरेली: स्वच्छता पर फूंके 18 करोड़, इस वर्ष नहीं मिला एक भी रुपया
बरेली, अमृत विचार। दो साल पहले ओडीएफ घोषित होने का तमगा हासिल करने वाले जनपद बरेली की ग्राम पंचायतों का इस बार ग्रामीण स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ना तय माना जा रहा है। इसके पीछे एक रुपये का बजट न मिलने की वजह बताई जा रही है। बीते वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया। …
बरेली, अमृत विचार। दो साल पहले ओडीएफ घोषित होने का तमगा हासिल करने वाले जनपद बरेली की ग्राम पंचायतों का इस बार ग्रामीण स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ना तय माना जा रहा है। इसके पीछे एक रुपये का बजट न मिलने की वजह बताई जा रही है। बीते वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया। स्वच्छ भारत मिशन योजना (एसबीएम) पर 18 करोड़ रुपये खर्च कर बड़ी संख्या में शौचालयों का निर्माण कराया गया लेकिन इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए एक रुपया भी नहीं मिला है।
हाल ही में हुई जिला योजना की बैठक में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए कोई भी धनराशि का प्रावधान नहीं रखा गया। 14 सितंबर को जिला योजना समिति के संयुक्त सचिव सत्यपाल ने बैठक का कार्यवृत्त जारी किया। तब इसका खुलासा हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए बजट नहीं मिला है।
यह बैठक 8 सितंबर को जनपद प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की अध्यक्षता में वर्चुअल हुई थी। बैठक में 38 मदों में वर्ष 2020-21 वित्तीय वर्ष के लिए 54057.00 लाख का परिव्यय निर्धारित किया गया था। इधर, कार्यवृत्त जारी होने के बाद चर्चा हो रही है कि ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के लिए बजट न मिलने का ग्राम पंचायतों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर भी पड़ेगा। ऐसी चर्चा ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी बैठकी में खूब हो रही है।
