बरेली: पटाखा बाजार का कारोबार पांच करोड़ होगा पार, ग्रीन पटाखों की इतनी मांग...यानी इस बार शुभ दीपावली
वायु प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली की हालत से सबक, शहर में पहली बार 40 से 50 प्रतिशत तक सेल ग्रीन पटाखों की
फोटो- मनोहर भूषण इंटर कॉलेज में आतिशबाजी की खरीदारी करते लोग।
बरेली, अमृत विचार। इस दिवाली पर शहर में ग्रीन पटाखों की मांग के हैरान करने वाले ये आंकड़े काफी सुखद भी हैं कि इस बार लोगों ने अब तक 40 से 50 फीसदी तक ग्रीन पटाखों की खरीदारी की है। पटाखों के थोक कारोबारियों का दावा है कि लगभग हर फुटकर दुकान पर इस बार ग्रीन पटाखों का स्टॉक है। दिवाली पर भीषण प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की तुलना में ये कुछ महंगे जरूर हैं लेकिन लोग इन्हें खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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दिवाली से पहले ही शहर में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। शनिवार को शहर के व्यस्त इलाकों में एक्यूआई दो सौ तक रिकॉर्ड हुआ जो न सिर्फ सामान्य से काफी ज्यादा है और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी। डॉक्टरों के मुताबिक इस स्तर का वायु प्रदूषण पहले से बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर भारी दुष्प्रभाव छोड़ सकता है।
दिल्ली का उदाहरण सामने है ही, लिहाजा बरेली में पहली बार ग्रीन पटाखों की ज्यादा मांग शहर के लिए शुभ संकेत तो है ही, इस बात का भी प्रमाण है कि शहर के लोग वायु प्रदूषण के खतरों से समय पर आगाह हो रहे हैं, वह भी सरकारी सिस्टम की ओर से जागरूकता के लिए कोई पहल किए बगैर।
शनिवार को हार्टमन रामलीला ग्राउंड और एमबी इंटर कॉलेज ग्राउंड समेत ज्यादातर जगह लगे पटाखा बाजार में दुकानों पर ग्रीन पटाखों का स्टॉक मौजूद था। दुकानदारों ने बताया कि इस बार ग्रीन पटाखे स्टॉक में हैं तो लोग इनकी खरीदारी भी कर रहे हैं।
शहर में ग्रीन पटाखों की सेल का औसत पिछले सालों से काफी ज्यादा है, हालांकि देहात के इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाले परंपरागत पटाखों की ही सेल हो रही है। थोक दुकानदार परविंदर ने बताया कि एमबी इंटर कॉलेज ग्राउंड पर तीन दिनों से पटाखों का बाजार लगा हुआ है। यहां अब तक ग्रीन पटाखों की 40 से 50 फीसदी तक सेल होने का अनुमान है।
ग्रीन पटाखों में नहीं होता प्रदूषण फैलाने वाला बेरियम
ग्रीन पटाखे पर्यावरण के लिए काफी बेहतर होते हैं। इनका आकार छोटा होता है और ये राख नहीं छोड़ते। इनमें बेरियम का इस्तेमाल नहीं होता जो साधारण पटाखों में चमक बढ़ाने के साथ बेतहाशा धुआं छोड़ने का कारण होता है। इनके फटने से भाप निकलती है जो प्रदूषण कम करने में मदद करती है।
ग्रीन पटाखे तीन तरह के होते हैं। पहला, स्वास पटाखे जिनमें भाप निकलती है जो धमाके के बाद कणों को हवा में नहीं फैलने देती और प्रदूषण कम होता है। सेफ थरमाइट पटाखे यानी स्टार में भी प्रदूषण वाले तत्वों की मात्रा कम होती है, ये कम आवाज के पटाखे होते हैं। सेफ मिनिमल एल्युमिनियम यानी सफल पटाखों में एल्यूमिनियम का इस्तेमाल नहीं होता। इनमें भी कम आवाज होती है।
ग्रीन पटाखों की अच्छी-खासी वैरायटी भी
कारोबारी मोहित अग्रवाल ने बताया कि हेलिकॉप्टर, मिस्ट्रो, लेजर, बिग शॉट, ब्रेक आउट, स्पिनर, फ्लॉवर पॉट,गोल्डन लॉयन, कलर कोटी जैसे इको फ्रेंडली पटाखे लोगों ने ज्यादा खरीदे हैं। परंपरागत फुलझड़ी, चकरी, अनार, रॉकेट भी लोगों ने खूब खरीदे। हार्टमैन ग्राउंड में कारोबारी शम्मी कपूर ने बताया कि ब्लू हैवन और ड्रोन पटाखे काफी बिके हैं जो ऊपर जाकर नीचे कैमरे की फ्लैश की तरह रोशनी फेंकते हैं। पांच सौ रुपये से ज्यादा की रेंज में ग्रीन पटाखे लोगों की पसंद रहे।
पटाखा बाजार में अब तक तीन करोड़ का कारोबार, दो करोड़ और आने की उम्मीद
सौ फुटा रोड और मिनी बाईपास से पटाखों की थोक दुकानों को हटाने का कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा। छोटी दिवाली तक शहर में करीब तीन करोड़ के पटाखे बिक गए। दुकानदारों को दिवाली के दिन दो करोड़ का कारोबार और होने की उम्मीद है। शनिवार को सुभाषनगर रेलवे ग्राउंड, रामलीला ग्राउंड हार्टमैन, कैंट सदर बाजार, इस्लामिया ग्राउंड और एमबी कॉलेज में लगे बाजार में सुबह से ही भीड़भाड़ की स्थिति रही। देर रात तक लोगों ने खरीदारी की। लोगों ने फैंसी पटाखों के साथ इको फ्रेंडली पटाखों की भी जमकर खरीदारी की।
बेतहाशा भीड़भाड़ वाले बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे हैं पटाखे
सौ फुटा रोड और मिनी बाईपास पर घनी आबादी के बीच चल रही पटाखों की थोक दुकानों को हटाने की प्रशासन की सख्ती की शहर के बीच भीड़भाड़ वाले बाजारों में धज्जियां उड़ रही हैं। पुलिस और अग्निशमन विभाग की सरपरस्ती में खतरे की अनदेखी कर सैकड़ों जगह पटाखे बिक रहे हैं।
जिला प्रशासन की ओर से सुभाषनगर रेलवे ग्राउंड, रामलीला ग्राउंड हार्टमैन, इस्लामिया ग्राउंड समेत गिनीचुनी जगहों पर ही पटाखों की फुटकर बिक्री के लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन कोई ऐसा इलाका नहीं है जहां पटाखों की दुकानों की भरमार न हो।
शहर के बीच शहामतगंज चौराहे पर पुलिस चौकी और थाना बारादरी से कुछ ही दूर दर्जनों फड़ और ठेलों पर पटाखे बेचे जा रहे हैं। शहर का प्रमुख किराना बाजार होने के कारण इस जगह इतनी भीड़भाड़ है कि अगर कोई हादसा हुआ तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है लेकिन पुलिस की सहमति है, इसलिए प्रशासन के आदेश भी धरे रह गए हैं।
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