World Diabetes Day 2023: डॉक्टरों ने किया आगाह, भारत में 136 मिलियन लोग प्री- डायबिटीज की जद में

World Diabetes Day 2023: डॉक्टरों ने किया आगाह, भारत में 136 मिलियन लोग प्री- डायबिटीज की जद में

लखनऊ, अमृत विचार। मधुमेह यानी डायबिटीज  (Diabetes) के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। भारत में स्थिति और ज्यादा खराब है। यहां मधुमेह यानी शुगर के मामले में इधर कुछ सालों में मधुमेह पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरुकता आये। इसी के चलते हर साल 14 नवंबर के दिन विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। राजधानी लखनऊ में भी लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए, रिसर्च सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (उत्तर प्रदेश शाखा) ने ऐतिहासिक नौबत खाना, बड़ा इमाम बाड़ा परिसर में  कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम विश्व मधुमेह दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया।

मधुमेह (1)

इस अवसर पर इमामबाड़ा परिसर स्थित नौबत खाना को नीली रौशनी से प्रकाशित किया गया। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन दुनिया भर में डायबिटीज के खिलाफ विश्व पहल का संचालन करती है और दुनिया के प्रमुख स्मारकों को नीली रोशनी से प्रकाशित करती है।

रिसर्च सोसाइटी फॉरस्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के उत्तर प्रदेश शाखा के सचिव डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि हमने लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़ा के परिसर में नौबत खाना को प्रकाशित कर, डायबिटीज के खिलाफ विश्व समुदाय की मुहिम के साथ अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस वर्ष के विश्व डायबिटीज दिवस का थीम है "अपने डायबिटीज के जोखिम को जानो" और नारा "अपने जोखिम को जानो, अपनी प्रतिक्रिया को जानो" है।

रिसर्च सोसाइटी फॉरस्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (उत्तर प्रदेश शाखा) चेयरमैन, प्रो. अनुज माहेश्वरी  ने कहा कि 'लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित हाल के ICMR अध्ययन के अनुसार, भारत में इस समय 2019 में 70 मिलियन लोगों की तुलना में 101 मिलियन डायबिटीज के मरीज हैं। कम से कम 136 मिलियन लोग, या 15.3 फीसदी जनसंख्या, प्री डायबिटीक है। डायबिटीज का सर्वाधिक प्रसार गोवा (26.4%), पुडुचेरी (26.3%) और केरला (25.5%) में देखा गया। राष्ट्रीय औसत 11.4 प्रतिशत है। हालांकि यह अध्ययन, चेतावनी देता है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और अरुणाचल प्रदेश जैसे कम प्रसार के राज्यों में डायबिटीज के मामलों का विस्फोट हो सकता है। यूपी में डायबिटीज की दर 4.8 प्रतिशत है, जो देश में सब से कम है, लेकिन राष्ट्रीय औसत 15.3 प्रतिशत की तुलना में 18 प्रतिशत जनसंख्या प्री- डायबिटिक हैं। जब कि भारत की जनसंख्या का 11.4 प्रतिशत डायबिटिक है, वही 15.3 प्रतिशत प्री-डायबिटिक हैं। इस का अर्थ यह है कि "उत्तर प्रदेश में हर डायबिटीज के मरीज़ पर, लगभग चार प्री-डायबिटीज के व्यक्ति हैं।  ये लोग शीघ्र ही डायबिटीज में परिवर्तित हो जाएंगे। दिल्ली में डायबिटिकसे प्री-डायबिटिक लोगों का अनुपात 1:1 है, महाराष्ट्र में 1:1.2, हरियाणा में 1:1.5 और यूपी में 1:3.8 है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर छठा रोगी भारतीय है। प्रो. अनुज माहेश्वरी ने कहा कि कम से कम 136 मिलियन प्री-डायबिटिक लोग हैं जिन्हें अच्छी जीवन शैली, संतुलित आहार और जॉगिंग, साइकिलिंग और अन्य खेलों जैसी व्यायाम के द्वारा डायबिटीज से बचाया जा सकता है।

प्रो. नरसिंह वर्मा ने कहा कि गंभीर संकट के दृष्टिकोण से लोगों के बीच जागरूकता की आवश्यकता है ताकि लोग सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि हर साल अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फाउंडेशन (आईडीएफ) 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस मनाता है जिस का उद्देश्य लोगों के बीच डायबिटीज के बारे में जागरूकता लाना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मधुमेह की गंभीरता के बारे में जागरूक किया जाता है और नियंत्रित करने के लिए रणनीतियों को हाइलाइट किया जाता है। प्रो. नरसिंह वर्मा ने कहा कि “डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम”  में यह देखा गया की केवल 5 फीसदी वजन कम करके 58 प्रतिशत डायबिटीज की संभावना को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रो. आमोद कुमार सचान ने लोगों से डायबिटीज के बारे में जागरूकता और निवारण के प्रयासों में शामिल होने के लिए जनमानस से आग्रह किया। उन्होंने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर जोर दिया और एकी कृत प्रयास से इस महामारी के विस्फोट को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकिता पांडे ने किया।

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