बरेली: अधिकारियों के दावों की पोल खोल रहे स्मार्ट सिटी के पार्क
बरेली,अमृत विचार। स्मार्ट सिटी के अधिकारी जिस अमृत योजना के तहत शहर के पार्कों का सुंदरीकरण कर वाहवाही लूट रहे हैं उसका हाल यह है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी बदहाल हैं। शौचालय, सड़क निर्माण में घटिया सामग्री लगने से यह बनने के साथ ही टूट चुके हैं। बदहाल पार्कों को कागजों में …
बरेली,अमृत विचार। स्मार्ट सिटी के अधिकारी जिस अमृत योजना के तहत शहर के पार्कों का सुंदरीकरण कर वाहवाही लूट रहे हैं उसका हाल यह है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी बदहाल हैं। शौचालय, सड़क निर्माण में घटिया सामग्री लगने से यह बनने के साथ ही टूट चुके हैं। बदहाल पार्कों को कागजों में चकाचक दिखाकर शासन को रिपोर्ट भेजकर बेहतर प्रदर्शन का दावा किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि अक्षर विहार बदहाल है।
वर्ष 2017 में अक्षर विहार, गांधी उद्यान, और सीआई पार्कों का सुंदरीकरण के लिए चयन अमृत योजना के तहत किया गया था। इन पार्कों का अक्टूबर 2017 में कायाकल्प हो जाना चाहिए था लेकिन कार्य लेटलतीफ होने की वजह से 2019 नवम्बर में पूरा हुआ। इसमें से गांधी उद्यान पर 121.87 लाख, सीआइ पार्क पर 154.77 और अक्षर विहार पार्क पर 112.10 लाख रुपये अमृत योजना के तहत खर्च किए गए हैं।

पार्कों में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से पौधरोपण, बच्चों के खेलने का मैदान, बाउंड्रीवॉल, आधुनिक कूड़ेदान, बेंच, पेयजल आपूर्ति, शेड, योगा के लिए जगह, बैडमिंटन और वालीबाल कोड, पानी के फव्वारे, स्वागत द्वार, साइकिल स्टैंड आदि कागजों में बन कर तैयार हैं। पर जमीनी हकीकत देखी जाए तो अक्षर विहार पार्क में बना शौचालय टूट रहा है। पेयजल आपूर्ति और बच्चों के खेलने की जगह पर घास उगी हुई है। पशुओं का चारागाह बनने के कारण लोगों का आना जाना भी पार्क में नहीं है।
सीआई पार्क और गांधी उद्यान की बात करें तो यहां पानी के फव्वारे खराब पड़े हैं। कैंटीन बनने के बाद अभी खुली नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि पार्कों में केवल करोड़ों रुपये का बजट खपाने का काम किया गया है। जो अफसरों के दावे की पोल खोलने के लिए काफी है।
