Allahabad High Court: गोमांस परिवहन पर प्रतिबंध संबंधी कोई विशेष नियम नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 और उससे जुड़े नियम विशेष रूप से राज्य के बाहर से उत्तर प्रदेश में गायों, बैलों आदि के परिवहन पर लागू होते हैं और गोमांस के परिवहन पर प्रतिबंध नहीं लगते हैं, क्योंकि वहां अधिनियम या नियमों में गोमांस की आवाजाही को प्रतिबंधित करने वाला कोई प्रावधान नहीं है।

उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने वसीम अहमद द्वारा दायर एक अपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए की जिसमें जिला मजिस्ट्रेट, फतेहपुर के उसे आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उसकी मोटरसाइकिल को उपरोक्त अधिनियम की धारा 5ए(7) के तहत शक्तियों को प्रयोग करते हुए जब्त किया गया था।

सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने कहा कि जब्ती अधिनियम के प्रावधानों का खंडन करती है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300(ए) द्वारा संरक्षित अधिकारों का उल्लंघन भी करती है। जब्ती शक्ति के वैद्य प्रयोग के अनुरूप नहीं है जिससे आदेश को रद्द करना आवश्यक है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के द्वारा दिए गए तर्कों को सुनने के बाद कहा कि अधिनियम की धारा 3 के तहत उत्तर प्रदेश के अंदर किसी भी स्थान पर गाय, बैल के वध पर प्रतिबंध लगाती है और धारा 5ए(1) के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसा करना निषिद्ध है।

कोर्ट ने आगे कहा कि अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी वाहन का उपयोग गोमांस या गायों और उनकी संतानों के परिवहन के लिए किया जाता है तो प्रवर्तन अधिकारियों के पास वाहन जब्त करने का अधिकार है। मुख्य रूप से कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण नियम, 1964 और 1955 के अधिनियम के तहत सक्षम अधिकारी को यह आरोप लगाना और स्थापित करना आवश्यक है कि जिस वाहन पर गोमांस का परिवहन किया जा रहा था वह इस अधिनियम के प्रावधानों और संबंधित नियमों का उल्लंघन करके किया जा रहा था। अंत में कोर्ट ने जब्ती आदेश को रद्द कर दिया और वाहन को रिलीज करने का निर्देश दिया।

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