बरेली: 60 लाख के घोटाले में फंसे प्रधान और सचिव, होगी रिकवरी
बरेली,अमृत विचार। प्रधान और सचिव घोटाला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राम पंचायत में विकास कार्य व अन्य कार्यों के लिए भेजी गई करीब 60 लाख की धनराशि प्रधान और सचिव डकार गए। जांच में घोटाला पकड़ में आने के बाद अब दोनों से रिकवरी की जाएगी। प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने …
बरेली,अमृत विचार। प्रधान और सचिव घोटाला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राम पंचायत में विकास कार्य व अन्य कार्यों के लिए भेजी गई करीब 60 लाख की धनराशि प्रधान और सचिव डकार गए। जांच में घोटाला पकड़ में आने के बाद अब दोनों से रिकवरी की जाएगी। प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने के साथ ही सचिव को भी निलंबित किया जाएगा।
मामला मीरगंज ब्लाक की ग्राम पंचायत लभेड़ा दुर्गाप्रसाद का है। पिछले साल ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिये शिकायत पत्र में गांव में स्ट्रीट लाइट, हैंडपंप रिबोर आदि कार्यों में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। आरोप है कि धरातल पर काम दिखाकर 60 लाख से अधिक का भुगतान साठगांठ से करा लिया गया। इसमें पंचायती राज विभाग के एक विवादित लिपिक का नाम भी शामिल है।
मामले की जांच जिलाधिकारी ने सहायक आयुक्त एवं निबंधक विकास कुमार से कराई तो जांच में ग्रामीणों के आरोप ठीक पाए गए। जांच में स्ट्रीट लाइट में 2.81 लाख, हैंडपंप मरम्मत और रिबोर में 5.65 लाख, कुर्सी व स्टेशनरी के नाम पर करीब 7.65 लाख, शौचालय समेत अन्य कार्यों पर दर्शाया गया करीब 60 लाख का हिसाब नहीं मिला। मौके पर जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं को भी बुलाया। इसके बाद जांच में गबन की पुष्टी होने पर रिपोर्ट जिलाधिकारी नितीश कुमार को भेज दी गई।
जिलाधिकारी ने डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार को प्रधान और सचिव के वित्तिय अधिकार सीज कर रिकवरी के आदेश जारी कर दिये। चर्चा यह भी है कि गड़बड़झाला उजागर होने के बाद प्रधान और सचिव कार्रवाई से बचने को सिफारिशें लगवा रहे हैं। इधर, डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार का कहना है जांच रिपोर्ट में प्रधान और सचिव दोषी मिले हैं। कार्यालय में कोरोना संक्रमित निकलने के बाद स्टाफ कम आ रहा है। कुछ लिपिक अवकाश पर भी है। इसलिए कार्रवाई में थोड़ा विलंब हो रहा है।
“जांच किस आधार पर की गई पता नहीं, मेरे साढ़े चार साल के कार्यकाल में निधि में 59 लाख रुपये आए ही नहीं है। अब तक करीब 30 लाख रुपये ही आए हैं।” -अमर सिंह, प्रधान
मामला तत्कालीन सचिव के समय का है। मेरे समय का यह प्रकरण नहीं है। छोटी सी ग्राम पंचायत में इतनी धनराशि आने का मतलब ही नहीं बनता। -ब्रजेश गौतम, सचिव
