जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक लोकसभा में पारित
नई दिल्ली। लोकसभा से आज जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 को मंजूरी मिल गई। इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार ने उर्दू और अंग्रेज़ी के साथ डोगरी, हिन्दी और कश्मीरी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में डालकर क्षेत्र की जनता …
नई दिल्ली। लोकसभा से आज जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 को मंजूरी मिल गई। इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार ने उर्दू और अंग्रेज़ी के साथ डोगरी, हिन्दी और कश्मीरी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में डालकर क्षेत्र की जनता की एक बहुत पुरानी और लंबित मांग को पूरा किया है।
उन्होंने कहा कि ये विधेयक भाषाई समानता की भावना के अनुरूप है। इससे पहले विधेयक पर चर्चा मे भाग लेते हए जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के सांसद हसनेन मसूदी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कानून बनाने का अधिकार जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है और संसद इस संबंध में कानून नहीं बना सकती।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि जब राज भाषा के तौर पर एक भाषा मौजूद है तो किसी भी राज्य में पांच आधिकारिक भाषाओं की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए ये विधेयक असंवैधानिक है।
केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने नेशनल कांफ्रेंस के सांसद के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि संसद सर्वोच्च है। ऐसे में नेशनल कांफ्रेंस के सांसद का एतराज उचित नहीं है बल्कि उन्हें तो खुश होना चाहिए कि कश्मीरी भाषा को दर्जा दिया जा रहा है। इस विधेयक का विरोध करके वह खुद बेनकाब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्वायत्ता की बात करने वाले हसनेन मसूदी की पार्टी पंचायती चुनाव के पक्ष में नहीं थी जबकि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पंचायती चुनाव करवाये।
